नई दिल्ली/लखनऊ। उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत करीब 1.86 लाख शिक्षकों को सर्वोच्च न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। न्यायालय ने शिक्षक पात्रता परीक्षा को अनिवार्य मानते हुए ऐसे शिक्षकों को इसे उत्तीर्ण करने के लिए 31 अगस्त 2028 तक का समय प्रदान किया है।इस निर्णय के बाद उन शिक्षकों की सेवाओं पर तत्काल संकट टल गया है, जो अभी तक शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर सके थे। लंबे समय से विचाराधीन इस मामले में यह प्रश्न उठ रहा था कि निर्धारित योग्यता के बिना कार्यरत शिक्षकों की सेवाएं जारी रह सकती हैं या नहीं।सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने शिक्षकों के लंबे अनुभव, विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था और विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए यह राहत प्रदान की। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि निर्धारित अवधि के भीतर सभी संबंधित शिक्षकों को परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा।निर्णय के बाद प्रदेश के विभिन्न शिक्षक संगठनों ने राहत व्यक्त करते हुए इसे शिक्षकों के हित में महत्वपूर्ण कदम बताया है। उनका कहना है कि इससे शिक्षकों को अपनी शैक्षिक योग्यता पूरी करने का पर्याप्त अवसर मिलेगा और विद्यालयों में शिक्षण कार्य भी प्रभावित नहीं होगा।शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार अब सरकार और संबंधित संस्थाओं की जिम्मेदारी होगी कि समय पर परीक्षाओं का आयोजन कराया जाए तथा शिक्षकों को परीक्षा में सम्मिलित होने के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराए जाएं।सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट कर दिया है कि 31 अगस्त 2028 तक की अवधि अंतिम होगी। इसके बाद सभी शिक्षकों के लिए निर्धारित योग्यता मानकों का पालन करना अनिवार्य रहेगा।

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