नई दिल्ली, 31 मई 26। केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगने वाले शुल्क में संशोधन करते हुए पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन पर कर का बोझ कम कर दिया है। नई दरें एक जून से लागू होंगी। सरकार के इस निर्णय को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और देश में ईंधन उपलब्धता की स्थिति को ध्यान में रखकर लिया गया है।जारी अधिसूचना के अनुसार पेट्रोल के निर्यात पर अब 1.50 रुपये प्रति लीटर, डीजल पर 13.50 रुपये प्रति लीटर तथा विमान ईंधन पर 9.50 रुपये प्रति लीटर शुल्क लिया जाएगा। हालांकि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले उत्पाद शुल्क में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया है, जिससे देश के भीतर ईंधन की कीमतों पर तत्काल कोई प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है।सरकार ने मार्च 2026 में पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच देश में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के उद्देश्य से निर्यात शुल्क व्यवस्था लागू की थी। इसके बाद समय-समय पर वैश्विक बाजार की परिस्थितियों के अनुसार दरों की समीक्षा की जाती रही है।पिछली समीक्षा में पेट्रोल के निर्यात पर 3 रुपये प्रति लीटर शुल्क निर्धारित किया गया था, जबकि डीजल पर 16.50 रुपये प्रति लीटर कर लगाया गया था। अब दोनों प्रमुख ईंधनों पर शुल्क में और कमी कर दी गई है। इससे पहले डीजल पर निर्यात शुल्क में कई बार बदलाव किए गए। एक समय यह 55.50 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया था, जिसे चरणबद्ध तरीके से घटाते हुए अब 13.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।विमान ईंधन पर भी सरकार ने उल्लेखनीय राहत दी है। पहले यह शुल्क 42 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया था, लेकिन लगातार समीक्षा के बाद इसे घटाकर 9.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। माना जा रहा है कि इससे विमानन क्षेत्र को भी कुछ राहत मिलेगी।विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का यह कदम घरेलू आवश्यकताओं और निर्यात के बीच संतुलन बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में हो रहे बदलावों पर नजर रखते हुए भविष्य में भी शुल्क दरों की समीक्षा की जा सकती है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता और ऊर्जा सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल हैं।