नई दिल्ली, 31 मई 26। देश में लोकसभा, विधानसभाओं और स्थानीय निकायों के चुनाव एक साथ कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ता दिखाई दे रहा है। इस विषय पर गठित संसदीय समिति ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर दी है, जिसमें चरणबद्ध तरीके से चुनाव कराने का सुझाव दिया गया है। रिपोर्ट के सामने आने के बाद देश में चुनाव व्यवस्था में बड़े बदलाव की संभावनाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है।समिति ने अपने अध्ययन में माना है कि बार-बार होने वाले चुनावों से प्रशासनिक तंत्र, सरकारी संसाधनों और विकास कार्यों पर प्रभाव पड़ता है। ऐसे में यदि चुनावी प्रक्रिया को एक निश्चित समय चक्र में समायोजित किया जाए तो शासन व्यवस्था अधिक प्रभावी और सुचारु बन सकती है। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि पहले चरण में लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए जाएं, जबकि दूसरे चरण में नगर निकायों और ग्राम पंचायतों के चुनाव निर्धारित अवधि में संपन्न हों।समिति ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस व्यवस्था को लागू करने के लिए संवैधानिक प्रावधानों के भीतर समाधान तलाशे जा सकते हैं। आवश्यकता पड़ने पर कुछ राज्यों की विधानसभाओं के कार्यकाल में सीमित अवधि का समायोजन किया जा सकता है, जिससे पूरे देश में चुनावी चक्र को एक समान बनाया जा सके। रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि पूर्व में विशेष परिस्थितियों में संसद और विधानसभाओं के कार्यकाल में परिवर्तन किए जा चुके हैं।इस विषय पर गठित अध्ययन समूह द्वारा विभिन्न राजनीतिक दलों, विधि विशेषज्ञों, निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों और अन्य पक्षों से विचार-विमर्श किया गया। लंबे अध्ययन और व्यापक चर्चा के बाद तैयार की गई सिफारिशों को समिति की रिपोर्ट का आधार बनाया गया है।अब यह रिपोर्ट संसद के आगामी सत्र में प्रस्तुत किए जाने की संभावना है। वहां इस विषय पर विस्तृत चर्चा होगी और विभिन्न दलों के विचार सामने आएंगे। यदि आवश्यक समर्थन प्राप्त होता है तो चुनाव प्रणाली में व्यापक बदलाव का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि एक साथ चुनाव की व्यवस्था लागू होने पर देश में चुनावी खर्च में कमी, प्रशासनिक संसाधनों का बेहतर उपयोग और विकास कार्यों में निरंतरता सुनिश्चित हो सकती है। हालांकि इस विषय पर अंतिम निर्णय संसद में होने वाली चर्चा और राजनीतिक सहमति के बाद ही संभव होगा।