मुजफ्फरनगर के केशवपुरी स्थित सरस्वती शिशु मंदिर इंटर कॉलेज में आयोजित पांच दिवसीय आचार्य प्रशिक्षण वर्ग का मंगलवार को समापन हो गया। अंतिम दिवस आधुनिक शिक्षण पद्धति, कला आधारित शिक्षा और भारतीय ज्ञान परंपरा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तार से मार्गदर्शन दिया। समापन अवसर पर सभी आचार्यों ने प्राप्त ज्ञान को शिक्षण कार्य में अपनाने का संकल्प लिया।

प्रथम सत्र में विद्यालय के प्रधानाचार्य गोविंद गुप्ता ने 21वीं सदी के आवश्यक कौशलों पर विचार रखते हुए कहा कि वर्तमान समय में शिक्षक और विद्यार्थियों दोनों के लिए निरंतर सीखना आवश्यक है। उन्होंने समय प्रबंधन, तार्किक चिंतन, संवाद कौशल, रचनात्मकता, नेतृत्व क्षमता और तकनीकी दक्षता को सफल जीवन की आधारशिला बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षक को अपने व्यक्तित्व, अनुशासन और कार्यशैली पर लगातार कार्य करना चाहिए।

द्वितीय सत्र में लाला जगदीश प्रसाद सरस्वती विद्या मंदिर के प्रधानाचार्य डॉ. अखिलेश शर्मा ने कला समेकित शिक्षण पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि कला शिक्षण को सरल, रोचक और प्रभावी बनाती है। संगीत, अभिनय, कविता, लोककला और गतिविधि आधारित शिक्षण से विद्यार्थियों में रचनात्मकता और आत्मविश्वास का विकास होता है। उन्होंने सप्ताह में एक दिन बिना बस्ते के शिक्षण दिवस आयोजित करने का सुझाव भी दिया।समापन सत्र में प्रांत शैक्षिक प्रमुख महेश शर्मा ने भारतीय ज्ञान परंपरा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा विज्ञान, गणित, चिकित्सा और दर्शन के क्षेत्र में विश्व को दिशा देती रही है। उन्होंने महर्षि चरक, सुश्रुत, आर्यभट्ट और भास्कराचार्य के योगदान का उल्लेख करते हुए नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने की आवश्यकता बताई।कार्यक्रम के अंत में प्रधानाचार्य गोविंद गुप्ता ने पांच दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग की समीक्षा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण तभी सार्थक होगा, जब उसका प्रभाव कक्षा शिक्षण में दिखाई दे। उन्होंने सभी आचार्यों से विद्यार्थियों में संस्कार, गुणवत्ता, भारतीयता और नवाचार आधारित शिक्षा का वातावरण तैयार करने का आह्वान किया।

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