मेरठ। बीए छात्रा ललिता गौतम की हत्या के मामले में न्याय की मांग को लेकर बुधवार को मेरठ कलेक्ट्रेट पर आयोजित दलित महापंचायत के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव उस समय बढ़ गया, जब धरना समाप्त कराने को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। घटनाक्रम के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए बल प्रयोग किया और कई लोगों को हिरासत में ले लिया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अविनाश पांडेय और पुलिस बल पर गंभीर आरोप लगाए, जबकि पुलिस प्रशासन ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक बताया।दलित समाज के प्रतिनिधियों, विभिन्न सामाजिक संगठनों तथा कांग्रेस नेता हेमंत प्रधान के आह्वान पर आयोजित महापंचायत में मेरठ के अलावा नोएडा, गाजियाबाद, हापुड़ और आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। प्रदर्शनकारी ललिता गौतम हत्याकांड में सभी आरोपियों की गिरफ्तारी, फास्ट ट्रैक अदालत में सुनवाई, दोषियों को कठोर दंड, पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग कर रहे थे।प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे शांतिपूर्वक धरने पर बैठे थे। उनका आरोप है कि कलेक्ट्रेट का मुख्य द्वार बंद किए जाने के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई और पुलिस ने प्रदर्शन समाप्त कराने के लिए बल प्रयोग किया। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, इसी दौरान लाठीचार्ज किया गया, जिससे कई लोगों को चोटें आईं।आंदोलन में शामिल लोगों का आरोप है कि कार्रवाई के दौरान कांग्रेस नेता हेमंत प्रधान, सुशील गौतम, डीएसपी जाटव, प्रमोद शेरगढ़ी, हिमांशु सिद्धार्थ, राहुल गौतम और शशिकांत गौतम समेत कई लोगों को हिरासत में लिया गया। प्रदर्शनकारियों का यह भी आरोप है कि हिरासत में लिए गए लोगों के साथ पुलिस वाहन में अभद्र व्यवहार किया गया।प्रदर्शनकारियों के अनुसार, नोएडा से आए अधिवक्ता रवि गौतम के साथ भी पुलिस द्वारा मारपीट की गई। उनका दावा है कि कथित दुर्व्यवहार से आहत होकर रवि गौतम ने पुलिस वाहन के भीतर अपने गमछे का फंदा बनाकर आत्महत्या का प्रयास किया। पुलिस वैन में प्रदर्शनकारियों के साथ एसएसपी द्वारा मारपीट भी की गई है। इन घटनाओं का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद मामला और चर्चा में आ गया। हालांकि वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।उधर, पुलिस प्रशासन का कहना है कि प्रदर्शन के कारण मुख्य मार्ग पर यातायात पूरी तरह बाधित हो गया था। अधिकारियों के अनुसार, कई दौर की बातचीत के बावजूद जब प्रदर्शनकारी सड़क खाली करने को तैयार नहीं हुए, तब कानून-व्यवस्था और यातायात बहाल करने के लिए कार्रवाई की गई। पुलिस ने यह भी कहा कि हिरासत में लिए गए कुछ लोगों के विरुद्ध विधि सम्मत धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जा रहा है।वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अविनाश पांडेय ने कहा कि ललिता गौतम हत्याकांड का खुलासा पहले ही किया जा चुका है तथा मुख्य आरोपी सहित अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग मामले को राजनीतिक रंग देकर भीड़ को उकसाने का प्रयास कर रहे थे। पुलिस का कहना है कि किसी भी व्यक्ति के साथ अवैध या अनावश्यक बल प्रयोग नहीं किया गया और पूरी कार्रवाई परिस्थितियों के अनुरूप की गई।घटना के बाद सामाजिक संगठनों और दलित समाज के प्रतिनिधियों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। उनका कहना है कि यदि पुलिस द्वारा आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया गया है तो इसकी स्वतंत्र जांच कराकर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में न्याय की मांग कर रहे लोगों के साथ ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।

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