जम्मू-कश्मीर में वैष्णो देवी चढ़ावा चांदी प्रकरण से जुड़ी शिकायत की जांच को लेकर दायर याचिका पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) अदालत ने क्राइम ब्रांच के जांच अधिकारी को 29 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से अभिलेखों सहित उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। अदालत में दाखिल स्टेटस रिपोर्ट पर शिकायतकर्ता की ओर से गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं।शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता दीपक शर्मा ने अदालत में कहा कि क्राइम ब्रांच ने मामले में प्रभावी जांच शुरू करने के बजाय शिकायत को प्रशासनिक स्तर पर एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय भेज दिया। उनके अनुसार पहले शिकायत क्राइम मुख्यालय श्रीनगर भेजी गई, जहां से उसे आगे कार्रवाई के लिए जोनल पुलिस मुख्यालय जम्मू भेज दिया गया। उनका तर्क था कि यह प्रक्रिया संज्ञेय अपराध की जांच के लिए अपेक्षित कानूनी कार्रवाई का विकल्प नहीं हो सकती।अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि क्राइम ब्रांच की आर्थिक अपराध शाखा गृह विभाग के अधीन अधिसूचित पुलिस थाना है और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 के तहत उसे स्वयं प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना करने का अधिकार और दायित्व प्राप्त है। उनका कहना था कि शिकायत को अन्य कार्यालयों को भेजकर जांच एजेंसी अपनी वैधानिक जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकती।याचिकाकर्ता ने यह आशंका भी व्यक्त की कि मामले से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य सुरक्षित रखने के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उन्होंने अदालत को बताया कि स्टॉक रजिस्टर, इन्वेंट्री रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, परिवहन संबंधी अभिलेख, टकसाल से हुआ पत्राचार तथा चांदी के भंडारण और प्रसंस्करण से जुड़े दस्तावेजों के नष्ट होने की आशंका बनी हुई है।दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने जांच अधिकारी को 29 जुलाई 2026 को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होकर समस्त अभिलेख प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। अब अदालत में होने वाली अगली सुनवाई पर इस मामले की जांच की दिशा और आगे की कार्रवाई को लेकर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।