मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश सरकार के बाल श्रम मुक्त अभियान के तहत रविवार को श्रम विभाग, पुलिस और विभिन्न सहयोगी संस्थाओं की संयुक्त टीम ने शहर के होटल, ढाबों, दुकानों और प्रतिष्ठानों पर व्यापक अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान 15 बाल एवं किशोर श्रमिकों को चिन्हित कर बाल श्रम से मुक्त कराया गया। इनमें छह बच्चे प्रतिबंधित एवं खतरनाक श्रेणी के कार्यों में लगे मिले, जिनके संबंध में संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।जिलाधिकारी उमेश मिश्रा और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा के निर्देश पर पुलिस अधीक्षक अपराध इंदू सिद्धार्थ तथा सहायक श्रम आयुक्त देवेश सिंह के नेतृत्व में गठित टीम ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में छापेमारी की। इस दौरान श्रम प्रवर्तन अधिकारी शालू राणा और बालेश्वर सिंह के साथ मानव तस्करी विरोधी थाना, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, चाइल्ड हेल्पलाइन तथा सामाजिक संस्था जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रन और ग्रामीण समाज विकास केंद्र के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।संयुक्त टीम ने भोपा रोड, आर्य समाज रोड, रेलवे स्टेशन रोड और भोपा बस स्टैंड सहित कई स्थानों पर निरीक्षण किया। अभियान के दौरान ईशा बेकरी, अरमान होटल और हयात होटल सहित विभिन्न प्रतिष्ठानों पर छह बच्चों के खतरनाक श्रेणी के कार्यों में लगे होने की पुष्टि होने पर श्रम विभाग ने निरीक्षण टिप्पणियां दर्ज करते हुए नियमानुसार कार्रवाई शुरू की। इसके अलावा नौ किशोर श्रमिकों को भी चिन्हित कर उनके संबंध में आवश्यक कार्रवाई की गई।सहायक श्रम आयुक्त देवेश सिंह ने कहा कि प्रत्येक बच्चे का पहला अधिकार शिक्षा है और 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से किसी भी प्रतिष्ठान में कार्य कराना कानूनन अपराध है। उन्होंने बताया कि ऐसे मामलों में बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम के तहत संबंधित सेवायोजक के खिलाफ एक वर्ष तक के कारावास या ₹20 हजार से ₹50 हजार तक के जुर्माने का प्रावधान है।श्रम प्रवर्तन अधिकारी बालेश्वर सिंह ने बताया कि बाल श्रम उन्मूलन अभियान 31 अगस्त तक लगातार जारी रहेगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि बाल श्रम की सूचना तत्काल प्रशासन को दें, ताकि बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए प्रभावी कार्रवाई की जा सके।