मुजफ्फरनगर। बुढाना विकासखंड के गांव भसाना में पशुपालकों को आधुनिक पशु चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने और लम्पी स्किन रोग सहित संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के उद्देश्य से विशेष पशु चिकित्सा शिविर आयोजित किया गया। सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय तथा पशुपालन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस शिविर को इफको टोकियो जनरल इंश्योरेंस लिमिटेड का वित्तीय सहयोग प्राप्त हुआ। शिविर में 180 से अधिक पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण कर उपचार और आवश्यक दवाएं वितरित की गईं।विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त के मार्गदर्शन में आयोजित शिविर में पशुपालकों को पशुओं के स्वास्थ्य संरक्षण, संक्रामक रोगों की पहचान और समय पर उपचार के प्रति जागरूक किया गया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय नियमित रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा शिविर, रोग निदान और परामर्श कार्यक्रम आयोजित कर पशुपालकों तक गुणवत्तापूर्ण सेवाएं पहुंचा रहा है।मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. जितेन्द्र कुमार गुप्ता ने बताया कि जिले के कुछ क्षेत्रों में पशुओं में लम्पी स्किन रोग के लक्षण मिले हैं। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए विभाग ने विशेष टीमें गठित कर प्रभावित क्षेत्रों में रिंग टीकाकरण शुरू कराया है। उन्होंने पशुपालकों से अपील की कि किसी भी पशु में बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें।वेटेरिनरी मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रोफेसर अमित कुमार वर्मा ने बताया कि लम्पी वायरस के संक्रमण से पशुओं के शरीर, विशेष रूप से सिर और गर्दन पर गांठें बन जाती हैं, जो उपचार में देरी होने पर घाव का रूप ले सकती हैं। उन्होंने बताया कि यह बीमारी मुख्य रूप से मच्छरों, मक्खियों और अन्य रक्त चूसने वाले कीटों के माध्यम से फैलती है। तेज बुखार, आंख और नाक से पानी आना तथा मुंह से लार गिरना इसके प्रमुख लक्षण हैं।उन्होंने पशुपालकों को सलाह दी कि पशुओं को प्रतिदिन नीम की पत्तियों से तैयार पानी से नहलाएं, पशुशालाओं की नियमित सफाई रखें तथा मक्खी-मच्छरों की रोकथाम के लिए स्वीकृत कीटनाशकों का समय-समय पर छिड़काव करें। साथ ही प्रत्येक पशु को प्रतिदिन खनिज मिश्रण और संतुलित आहार देने पर भी जोर दिया।शिविर के दौरान डॉ. अफरोज, डॉ. तरुण कुमार, डॉ. शुभमदीप, डॉ. आशुतोष राय, डॉ. स्नेहा गुप्ता, डॉ. इशिता और डॉ. ईशान की टीम ने पशुओं का परीक्षण कर आवश्यक उपचार, कृमिनाशक दवाएं, खनिज मिश्रण तथा रोगों की रोकथाम संबंधी परामर्श दिया। कार्यक्रम के सफल संचालन में उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी बुढाना डॉ. शिव कुमार गंगवार, पशुधन प्रसार अधिकारियों और स्थानीय ग्रामीणों का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा।

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