मुजफ्फरनगर में श्रावण कांवड़ यात्रा के दौरान मानवता और त्वरित चिकित्सा व्यवस्था का एक प्रेरक उदाहरण सामने आया। दिल्ली निवासी सात माह की गर्भवती महिला कांवड़िया, जो अकेले गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर जा रही थी, रास्ते में अचानक अस्वस्थ हो गई। स्थिति गंभीर होने पर उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों की देखरेख में उसने दो स्वस्थ बच्चों को जन्म दिया। वर्तमान में मां और दोनों नवजात पूरी तरह स्वस्थ बताए जा रहे हैं।जानकारी के अनुसार, महिला कांवड़ यात्रा के दौरान अकेले पैदल यात्रा कर रही थी। इसी बीच उसकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। आसपास मौजूद लोगों ने तत्काल इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों और स्वास्थ्यकर्मियों को दी। मौके पर पहुंची चिकित्सा टीम ने प्राथमिक उपचार देने के बाद महिला को अस्पताल में भर्ती कराया, जहां चिकित्सकों ने आवश्यक जांच के बाद सुरक्षित प्रसव कराया।अस्पताल प्रशासन के अनुसार समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होने से प्रसव बिना किसी बड़ी जटिलता के संपन्न हुआ। महिला ने जुड़वां बच्चों को जन्म दिया और तीनों की स्थिति सामान्य बनी हुई है। चिकित्सकों की टीम लगातार मां और दोनों नवजातों के स्वास्थ्य पर निगरानी रख रही है।घटना की जानकारी मिलते ही अस्पताल प्रशासन ने महिला के परिजनों को सूचित कर दिया। परिजनों के अस्पताल पहुंचने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि कांवड़ यात्रा मार्ग पर स्थापित चिकित्सा शिविरों और स्वास्थ्य सेवाओं का उद्देश्य ऐसी आपात स्थितियों में तत्काल सहायता उपलब्ध कराना है, जिससे श्रद्धालुओं को समय रहते उपचार मिल सके।स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि महिला और दोनों नवजात पूरी तरह सुरक्षित हैं तथा आवश्यक चिकित्सकीय देखभाल जारी है। समय पर मिले उपचार और चिकित्सा टीम की तत्परता से मां और दोनों बच्चों का स्वास्थ्य सुरक्षित रखा जा सका।