हापुड़ में सावन माह की कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धा और पारिवारिक संस्कारों की अनूठी मिसाल देखने को मिली। हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौट रहे 35 युवकों ने अपनी 90 वर्षीय दादी को पालकी में बैठाकर पैदल यात्रा पूरी की। जैसे ही यह जत्था हापुड़ पहुंचा, रास्ते में मौजूद श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने इस दृश्य की सराहना की। कई लोगों ने युवकों के इस प्रयास को भारतीय पारिवारिक मूल्यों का प्रेरक उदाहरण बताया।जानकारी के अनुसार, सभी युवक हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर पैदल लौट रहे थे। उन्होंने अपनी बुजुर्ग दादी को विशेष रूप से सजी पालकी में बैठाया और पूरी यात्रा के दौरान बारी-बारी से अपने कंधों पर पालकी उठाकर आगे बढ़ते रहे। परिवार के सदस्यों ने बताया कि यह संकल्प दादी की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और पूरे परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के साथ लिया गया था।हापुड़ पहुंचने पर इस अनोखी कांवड़ यात्रा ने लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। श्रद्धालुओं और राहगीरों ने युवकों के सेवा भाव और बुजुर्गों के प्रति सम्मान की खुलकर प्रशंसा की। कई लोगों ने इस दृश्य को अपने मोबाइल में कैद किया और इसे श्रवण कुमार की परंपरा से प्रेरित एक अनुकरणीय पहल बताया।कांवड़ यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था में तैनात पुलिसकर्मियों ने भी पालकी में बैठी 90 वर्षीय दादी का सम्मानपूर्वक अभिवादन किया। पुलिसकर्मियों ने श्रद्धालुओं की सुरक्षित और व्यवस्थित यात्रा की कामना करते हुए युवकों के सेवा भाव की सराहना की।सावन के पवित्र माह में कांवड़ यात्रा के दौरान सामने आया यह दृश्य श्रद्धा, पारिवारिक एकता और बुजुर्गों के प्रति सम्मान का संदेश देता नजर आया। स्थानीय लोगों का कहना था कि ऐसे उदाहरण समाज में नई पीढ़ी को अपने संस्कारों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के प्रति प्रेरित करते हैं।