मुजफ्फरनगर। राष्ट्रीय हिंदू शक्ति संगठन ने रेलवे स्टेशन के सामने स्थित शत्रु संपत्ति की खाली पड़ी करीब 400 वर्ग गज जमीन पर मंदिर निर्माण की अनुमति देने की मांग की है। संगठन की ओर से इस संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, शत्रु संपत्ति अभिरक्षक विभाग, गृह मंत्रालय और शत्रु संपत्ति के कस्टोडियन के रूप में जिलाधिकारी मुजफ्फरनगर को ज्ञापन भेजा गया है।संगठन ने ज्ञापन में दावा किया है कि रेलवे स्टेशन के सामने खसरा नंबर 930 की जमीन सरकारी अभिलेखों में शत्रु संपत्ति के रूप में दर्ज है। संगठन का आरोप है कि इस संपत्ति के एक हिस्से में मस्जिद सहित अन्य निर्माण हैं और वहां गतिविधियां संचालित हो रही हैं। ज्ञापन में कहा गया है कि संबंधित संपत्ति को खाली कराने और सरकारी कब्जे में लेने की मांग लंबे समय से की जाती रही है, लेकिन इस दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है।राष्ट्रीय हिंदू शक्ति संगठन ने मस्जिद के बराबर में खाली पड़ी लगभग 400 वर्ग गज जमीन को मंदिर निर्माण के लिए उपलब्ध कराने की मांग की है। संगठन का कहना है कि यदि उक्त भूमि शत्रु संपत्ति है और उसके आसपास धार्मिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं तो हिंदू समाज को भी वहां मंदिर निर्माण की अनुमति दी जानी चाहिए। संगठन ने प्रशासन से इस मामले में स्पष्ट नीति अपनाने और मंदिर निर्माण के लिए नियमानुसार अनुमति देने की मांग की है।ज्ञापन में संगठन ने कहा कि मंदिर निर्माण के लिए आवश्यक सभी कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी करने के लिए वह तैयार है। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि अनुमति मिलने के बाद सामाजिक और प्रतिष्ठित लोगों के सहयोग से मंदिर का शिलान्यास कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।इसके साथ ही संगठन ने साकेत कॉलोनी में स्थित एक मजार तथा रुड़की रोड स्थित मजार को हटाने की मांग भी प्रशासन से की है। संगठन ने इन स्थलों के संबंध में भी प्रशासन से जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग उठाई है।ज्ञापन देने वालों में संजय अरोड़ा, राजीव कुमार बंसल, सरिता शर्मा अरोड़ा, प्रवीण जैन, कन्हैया लाल शर्मा, राजू वाल्मीकि, संजीव मलिक, प्रदीप कुमार, राजकुमार गर्ग, राजेश शर्मा, श्याम वर्मा, अनिल मलिक, सचिन पवार, हरीश चौधरी, विनोद मलिक, नितिन बंसल, संजीव शर्मा और अमरीश शर्मा समेत संगठन के अनेक पदाधिकारी मौजूद रहे। संगठन के मीडिया प्रभारी श्याम वर्मा ने बताया कि ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन और सरकार से मामले में जल्द निर्णय लेने की मांग की गई है।