मुजफ्फरनगर जनपद में मृत बेसहारा गौवंश के अंतिम संस्कार के लिए निर्धारित स्थान न होने का मुद्दा अब तूल पकड़ता जा रहा है। नगर पालिका परिषद की कार्यप्रणाली से आक्रोशित गौसेवकों ने गुरुवार को अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। गौसेवकों ने ऐलान किया है कि जब तक प्रशासन उन्हें अंतिम संस्कार के लिए स्थायी भूमि उपलब्ध नहीं कराता, तब तक वे नंगे पांव रहकर अपना विरोध दर्ज कराते रहेंगे।
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे गौसेवक नीशू ने बताया कि वे वर्षों से बेसहारा और घायल गौवंश की सेवा में लगे हुए हैं। सड़कों और गलियों में भटकते पशुओं को उपचार देना, उनके लिए चारे-पानी की व्यवस्था करना और उनकी देखभाल करना उनका नियमित कार्य है। लेकिन जब इन पशुओं की मृत्यु हो जाती है, तब उनके सम्मानजनक अंतिम संस्कार के लिए शहर में कोई तय स्थान नहीं है, जो बेहद पीड़ादायक स्थिति है।
उन्होंने कहा कि जगह के अभाव में मजबूरी में कभी खाली प्लॉट, तो कभी शहर से दूर असुविधाजनक स्थानों पर अंतिम संस्कार करना पड़ता है। इससे न केवल धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं, बल्कि स्वच्छता और पर्यावरण से जुड़ी गंभीर समस्याएं भी उत्पन्न होती हैं।
गौसेवकों का आरोप है कि इस गंभीर समस्या को लेकर कई बार नगर पालिका परिषद के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से शिकायत की गई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन देकर मामले को टाल दिया गया। कोई ठोस कदम आज तक नहीं उठाया गया, जिससे गौसेवकों में आक्रोश बढ़ता गया।
प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को स्पष्ट करते हुए प्रशासन से कहा है कि मृत पशुओं के अंतिम संस्कार के लिए कम से कम 5 बीघा भूमि तत्काल उपलब्ध कराई जाए। इसके साथ ही उस भूमि की चारदीवारी कर उसे सुरक्षित बनाया जाए और आवश्यक सामग्री रखने के लिए एक स्थायी कक्ष का निर्माण कराया जाए, ताकि अंतिम संस्कार की प्रक्रिया व्यवस्थित रूप से हो सके।
इसके अलावा गौसेवकों ने शहर में बढ़ती आवारा कुत्तों की समस्या को भी उठाया और उनकी नसबंदी व उपचार के लिए स्थायी केंद्र स्थापित करने की मांग की। वहीं बंदरों के बढ़ते आतंक से निजात दिलाने के लिए उन्हें वन क्षेत्रों में स्थानांतरित करने की व्यवस्था करने की भी मांग रखी गई।
गौसेवकों का कहना है कि यह केवल उनकी व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि पूरे शहर की व्यवस्था से जुड़ा विषय है, जिसे लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

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