मुजफ्फरनगर जनपद में ईंट भट्टा उद्योग इन दिनों आर्थिक दबाव के दौर से गुजर रहा है। बढ़ती लागत, बेमौसम बारिश और श्रमिकों से जुड़ी समस्याओं के चलते भट्टा संचालकों ने अब एकजुट होकर ईंटों के दाम बढ़ाने का निर्णय लिया है।
जानकारी के अनुसार, मोरना क्षेत्र के ककरौली इलाके में जानसठ-मोरना मार्ग स्थित एक भट्टे पर क्षेत्र के भट्टा संचालकों की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में उद्योग की वर्तमान स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई और समस्याओं को लेकर चिंता जताई गई।
मुजफ्फरनगर ईंट निर्माता समिति के महामंत्री मोहम्मद शमशाद ने बताया कि भट्टा उद्योग लगातार घाटे की ओर बढ़ रहा है। कोयला, मिट्टी की खुदाई, परिवहन और मजदूरी की लागत में लगातार वृद्धि हो रही है, जिससे उत्पादन खर्च काफी बढ़ गया है।
उन्होंने यह भी बताया कि हाल ही में हुई बेमौसम बारिश से कच्ची ईंटों को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे कई भट्टा संचालकों को आर्थिक झटका लगा है। ऐसे में पुराने रेट पर ईंट बेचना अब संभव नहीं रह गया है।
बैठक में मौजूद सभी संचालकों ने सर्वसम्मति से अव्वल श्रेणी की ईंट का नया रेट ₹6000 प्रति हजार तय किया। उनका कहना है कि यह निर्णय मजबूरी में लिया गया है, ताकि उद्योग को चलाया जा सके और नुकसान को कुछ हद तक नियंत्रित किया जा सके।
इसके साथ ही बैठक में श्रमिकों से जुड़ी समस्याओं पर भी चर्चा हुई। संचालकों ने आरोप लगाया कि कई बार मजदूर अग्रिम भुगतान लेने के बाद बीच में काम छोड़ देते हैं और विरोध करने पर फर्जी मुकदमों की धमकी देते हैं, जिससे काम प्रभावित होता है।
बैठक में राजीव राठी, नदीम अब्बास, वीरेंद्र सिंह, अक्षु, बाबर अब्बास, मिंटू, अब्दुल्ला, आजाद, रविंद्र सिंह और डॉ. शाहनवाज सहित कई भट्टा संचालक उपस्थित रहे।
भट्टा मालिकों ने प्रशासन से मांग की है कि उद्योग से जुड़ी समस्याओं का समाधान कराया जाए, ताकि भट्टा व्यवसाय को संकट से बाहर निकाला जा सके।
