नई दिल्ली। हरिवंश नारायण सिंह को एक बार फिर राज्यसभा का उपसभापति निर्विरोध चुन लिया गया है। शुक्रवार को उनके निर्वाचन की औपचारिक घोषणा के साथ ही उन्होंने लगातार तीसरी बार इस महत्वपूर्ण संवैधानिक पद की जिम्मेदारी संभाल ली। उनके दोबारा चुने जाने को संसद में उनके प्रति व्यापक विश्वास के रूप में देखा जा रहा है।
उपसभापति पद उनके पिछले कार्यकाल के समाप्त होने के बाद रिक्त हो गया था। इसके बाद चुनाव प्रक्रिया सी. पी. राधाकृष्णन (उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति) की देखरेख में निर्धारित नियमों के तहत संपन्न कराई गई। नामांकन दाखिल करने की अंतिम समय सीमा गुरुवार दोपहर 12 बजे तय की गई थी।
चुनाव प्रक्रिया के दौरान हरिवंश नारायण सिंह के समर्थन में कुल पांच नामांकन पत्र दाखिल हुए, जबकि विपक्ष की ओर से कोई उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारा गया। विपक्ष ने इस चुनाव का बहिष्कार करते हुए लोकसभा में उपाध्यक्ष पद पर नियुक्ति न किए जाने को प्रमुख कारण बताया।
निर्वाचन के बाद नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि लगातार तीसरी बार इस पद पर चुना जाना उनके प्रति सदन के विश्वास और सम्मान को दर्शाता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि हरिवंश अपने अनुभव, संतुलन और निष्पक्षता के साथ राज्यसभा की कार्यवाही को और अधिक प्रभावी बनाएंगे।
हरिवंश नारायण सिंह का पुनर्निर्वाचन न केवल उनके संसदीय अनुभव को रेखांकित करता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि आने वाले समय में राज्यसभा की कार्यप्रणाली में स्थिरता और गरिमा बनाए रखने में उनकी भूमिका अहम बनी रहेगी।

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