मुजफ्फरनगर। विद्युत विभाग के निजीकरण के विरोध में जनपद में बिजली कर्मियों का आंदोलन तेज हो गया है। शुक्रवार को विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए सरकार और विद्युत निगम प्रबंधन के खिलाफ कड़ा विरोध जताया। कर्मचारियों ने साफ चेतावनी दी कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो बिजली आपूर्ति बाधित करने जैसे कठोर कदम उठाए जा सकते हैं।
प्रदर्शन के दौरान आयोजित सभा को संबोधित करते हुए समिति के नेताओं जितेंद्र सिंह गुर्जर, मोहम्मद वसीम और निखिल कुमार ने कहा कि प्रदेश में बिजली वितरण कंपनियों के निजीकरण की प्रक्रिया कर्मचारियों और उपभोक्ताओं दोनों के हितों के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की तैयारी तेजी से की जा रही है, जिससे हजारों कर्मचारियों के भविष्य पर संकट मंडरा रहा है।
वक्ताओं ने बताया कि यह आंदोलन पिछले 506 दिनों से लगातार जारी है, लेकिन इसके बावजूद सरकार और प्रबंधन स्तर पर कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया। उन्होंने कहा कि एक ओर कर्मचारी कड़ी मेहनत कर भीषण गर्मी में उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उन्हें उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है।
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों को बिना कारण हटाया जा रहा है तथा नियमित कर्मचारियों के मनमाने तबादले किए जा रहे हैं। इसके अलावा आंदोलन में शामिल कर्मचारियों पर दमनात्मक कार्रवाई भी की जा रही है, जिसे किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
संघर्ष समिति ने मांग की कि आंदोलन के दौरान की गई सभी कार्रवाई तुरंत वापस ली जाए, हटाए गए कर्मचारियों को बहाल किया जाए और निजीकरण की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए।
सभा में वक्ताओं ने स्पष्ट कहा कि यदि जल्द ही वार्ता के माध्यम से समाधान नहीं निकाला गया, तो आने वाले समय में आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी स्थिति में बिजली आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और प्रबंधन की होगी।
कार्यक्रम के अंत में कर्मचारियों ने एकजुटता बनाए रखने का संकल्प लिया और आंदोलन को और व्यापक स्तर पर ले जाने का ऐलान किया।
