मुजफ्फरनगर। जिले में साइबर ठगी के संगठित नेटवर्क पर पुलिस की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। इसी क्रम में साइबर क्राइम थाना टीम ने दो ऐसे युवकों को गिरफ्तार किया है, जो मामूली कमीशन के लालच में अपने बैंक खातों को साइबर अपराधियों के लिए इस्तेमाल करने दे रहे थे। शुरुआती जांच में खुलासा हुआ है कि इन खातों के जरिए हाल के महीनों में 80 लाख रुपये से अधिक की संदिग्ध धनराशि का लेन-देन किया गया।
पूरे मामले की परतें तब खुलनी शुरू हुईं जब गृह मंत्रालय के साइबर निगरानी पोर्टल “प्रतिबिम्ब” पर मुजफ्फरनगर से जुड़े फर्जी कॉल और ऑनलाइन ठगी की कई शिकायतें दर्ज हुईं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए साइबर क्राइम थाना पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की, जिसमें कुछ बैंक खाते संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त पाए गए। इन्हीं खातों की कड़ियां जोड़ते हुए पुलिस पहले ही मुख्य आरोपी समेत तीन लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी थी।
जांच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने अब तालिब निवासी रामपुरम और अरमान निवासी अंबा विहार को हिरासत में लिया है। पूछताछ में दोनों आरोपियों ने स्वीकार किया कि उनका संपर्क गिरोह के मुख्य संचालक मयूर अफजल राणा से हुआ था। राणा ने उन्हें क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग के नाम पर खातों के इस्तेमाल का प्रस्ताव दिया और बदले में मोटा कमीशन देने का लालच दिया।
आरोपियों के अनुसार, वे करीब पांच प्रतिशत कमीशन के एवज में अपने बैंक खातों को साइबर अपराधियों के लिए उपलब्ध कराते थे। जब ठगी की रकम उनके खातों में ट्रांसफर होती थी, तो वे एटीएम और चेक के माध्यम से नकदी निकालकर अपना हिस्सा काट लेते और शेष रकम मुख्य आरोपी तक पहुंचा देते थे। पुलिस का मानना है कि यह पूरा नेटवर्क संगठित तरीके से देशभर में साइबर ठगी को अंजाम दे रहा था।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि इन खातों से जुड़े मामलों में विभिन्न राज्यों से करीब 18 करोड़ रुपये की साइबर ठगी से संबंधित 30 शिकायतें दर्ज हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि गिरोह का नेटवर्क कितना व्यापक और संगठित था।
फिलहाल साइबर क्राइम थाना पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर अन्य सहयोगियों और संदिग्ध खातों की जानकारी जुटा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इस पूरे गिरोह के नेटवर्क का बड़ा खुलासा किया जाएगा।

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