मुजफ्फरनगर। वर्ष 2016 में थाना जानसठ क्षेत्र के गांव पिमोड़ा में हुए चर्चित शईद खां हत्याकांड में अदालत ने लंबी सुनवाई के बाद दोनों आरोपियों को बरी कर दिया। फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 ने मामले में प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का परीक्षण करने के बाद माना कि अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने में सफल नहीं हो सका। अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए दोनों आरोपियों को दोषमुक्त कर जेल से रिहा करने के आदेश जारी किए।करीब आठ वर्ष पहले सामने आए इस हत्याकांड ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी थी। जानकारी के अनुसार गांव पिमोड़ा निवासी शईद खां 28 अगस्त 2016 की सुबह खेत पर काम करने के लिए घर से निकले थे। देर शाम तक वापस नहीं लौटने पर परिजनों को चिंता हुई और उन्होंने उनकी तलाश शुरू की। काफी खोजबीन के बाद गांव के बाहर गन्ने के खेत में शईद खां का शव पड़ा मिला था। घटनास्थल के बाहर उनकी साइकिल और कपड़े भी पड़े मिले थे। शव मिलने की सूचना पर ग्रामीणों की भारी भीड़ मौके पर जमा हो गई थी।घटना के बाद मृतक के पुत्र मोहम्मद नसीम खां ने अज्ञात हमलावरों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और विवेचना के दौरान गांव के ही असलम पुत्र फत्तू तथा कामिल पुत्र असगर को आरोपी बनाते हुए उनके खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी थी।मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोपियों को दोषी साबित करने के लिए वादी सहित नौ गवाह अदालत में पेश किए। वहीं बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संदीप कुमार त्यागी ने अदालत में दलील दी कि पूरे मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह मौजूद नहीं है और न ही पुलिस कोई ऐसा ठोस सबूत प्रस्तुत कर पाई, जिससे यह साबित हो सके कि हत्या में दोनों आरोपियों की भूमिका थी। बचाव पक्ष ने कहा कि केवल शक के आधार पर आरोपियों को फंसाया गया।फास्ट ट्रैक कोर्ट के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और केस डायरी में मौजूद साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ साक्ष्यों की मजबूत श्रृंखला स्थापित नहीं कर पाया। अदालत ने कहा कि हत्या जैसे गंभीर मामले में केवल संदेह के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इसी आधार पर अदालत ने दोनों आरोपियों को बाइज्जत बरी करने का फैसला सुनाया।