नई दिल्ली / लखनऊ, 22 जनवरी: दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्नाव (उत्तर प्रदेश) के चर्चित बलात्कार-हत्या मामले में विवादित नेता कुलदीप सिंह सेंगर की राहत याचिका खारिज कर दी है। इस याचिका में सेंगर ने अपने 10 साल के सजा आदेश पर रोक लगाने तथा जमानत की मांग की थी, जिसे पेशेवर तर्कों के साथ कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया।
सेंगर पर आरोप है कि 2017 में उन्नाव की एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार किया गया था, और बाद में पीड़िता के पिता की हिरासत में रह कर संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। इस घातक घटना ने पूरे उत्तर प्रदेश और देश में न्यायिक प्रक्रियाओं, पुलिसकर्मियों की भूमिका तथा राजनीतिक संरक्षण जैसे मुद्दों पर गहरी बहस छेड़ी थी।
उच्च न्यायालय ने कहा कि ट्रायल कोर्ट द्वारा सेंगर को दी गई दश वर्ष सजा पर फिलहाल रोक लगाने का कोई ठोस आधार नहीं मिला है। कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि अपील को प्राथमिकता से सुनना चाहिए, ताकि न्यायिक प्रक्रिया शीघ्र पूरी हो सके।
इस फैसले के बाद सेंगर को अब भी न्यायिक हिरासत में ही रहना होगा। दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देश के बाद मुख्य अपील अब तेजी से आगे बढ़ने की संभावना है।
विशेष रूप से अदालत ने कहा कि अभी तक पेश किए गए सबूतों में ऐसा कोई नया तथ्य नहीं है जो सजा पर रोक का कारण बने।
उन्नाव घटना ने सामाजिक न्याय, बलात्कार पीड़ितों की सुरक्षा और कानून के लागू होने की वास्तविकता पर सवाल खड़े किए हैं। अब न्यायपालिका की ओर से अपील सुनवाई के बाद अंतिम निर्णय आने तक पूरे देश की निगाहें इस केस पर बनी रहेंगी।

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