मेरठ में दिल्ली-देहरादून राष्ट्रीय राजमार्ग पर कांवड़ यात्रा के दौरान दो कांवड़िया समूहों के बीच हुए विवाद का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने पूरे मामले का स्पष्टीकरण जारी किया है। पुलिस ने वायरल दावे को भ्रामक बताते हुए कहा कि वीडियो में जिस व्यक्ति को वाहन से खींचते हुए दिखाया जा रहा है, वह पुलिसकर्मी नहीं बल्कि दूसरे पक्ष का एक कांवड़िया है। साथ ही पुलिस ने स्पष्ट किया कि घटना में किसी भी पुलिसकर्मी के साथ मारपीट नहीं हुई और न ही कोई पुलिसकर्मी घायल हुआ।पुलिस के अनुसार विवाद की शुरुआत दो बाइक सवार युवकों की आपसी टक्कर के बाद हुई। टक्कर के बाद दोनों पक्षों के कांवड़ियों के बीच कहासुनी शुरू हो गई, जो देखते ही देखते मारपीट में बदल गई। सूचना मिलते ही आसपास मौजूद सादे वस्त्रों में तैनात पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों को शांत कराने का प्रयास किया।मेरठ के पुलिस अधीक्षक नगर आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि बीच-बचाव के दौरान हल्की धक्का-मुक्की जरूर हुई, लेकिन सोशल मीडिया पर जिस तरह पुलिसकर्मियों को जीप से खींचकर पीटने और उनके कपड़े फाड़ने का दावा किया जा रहा है, वह पूरी तरह असत्य है। उन्होंने कहा कि किसी भी पुलिसकर्मी के साथ ऐसी कोई घटना नहीं हुई और न ही कोई पुलिसकर्मी घायल हुआ।उन्होंने यह भी बताया कि वायरल वीडियो की जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ है कि वाहन से नीचे खींचा गया व्यक्ति पुलिसकर्मी नहीं बल्कि विवाद में शामिल दूसरे पक्ष का एक कांवड़िया था। इसलिए वीडियो के साथ प्रसारित किए जा रहे दावों का वास्तविक घटना से कोई संबंध नहीं है।मेरठ पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित किसी भी वीडियो या संदेश पर विश्वास करने से पहले उसकी सत्यता की जांच अवश्य करें। पुलिस ने कहा कि भ्रामक और अपुष्ट सूचनाएं साझा करने वालों पर नजर रखी जा रही है तथा अफवाह फैलाने का प्रयास करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।