मुजफ्फरनगर। कवाल ग्राम पंचायत में विकास कार्यों और स्वच्छता अभियान से जुड़ी योजनाओं को लेकर नया विवाद सामने आया है। ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव पर कथित रूप से फर्जी अभिलेख तैयार कर शासन को गुमराह करने तथा सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप लगाए गए हैं। मामले को लेकर गांव के कुछ लोगों ने मुख्य विकास अधिकारी को शिकायती पत्र सौंपकर निष्पक्ष जांच और कठोर कार्रवाई की मांग की है।शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि ग्राम पंचायत को स्वच्छता अभियान के अंतर्गत विशेष श्रेणी में दर्शाने के लिए कथित रूप से गलत सत्यापन रिपोर्ट तैयार की गई। आरोप है कि रिपोर्ट में ऐसे अधिकारियों के नाम और हस्ताक्षर दर्शाए गए, जिन्होंने संबंधित जांच या निरीक्षण में भाग ही नहीं लिया। मामले के सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है।ग्रामीणों का कहना है कि गांव में पिछले कई वर्षों के विकास कार्यों को लेकर पहले से जांच चल रही है। इसी दौरान अभिलेखों की जांच में कई विसंगतियां सामने आईं। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि विकास कार्यों के नाम पर बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गईं और सरकारी धन के उपयोग में पारदर्शिता नहीं बरती गई।मामले में शिकायत करने वाले लोगों का यह भी कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ उन्हें दबाव और धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग करते हुए कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाए।प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार ग्राम पंचायत में पिछले वर्षों में हुए कार्यों की जांच के लिए समिति गठित की गई है। समिति निर्धारित तिथि पर गांव पहुंचकर विकास कार्यों, अभिलेखों और खर्च से संबंधित दस्तावेजों की जांच करेगी। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।मामले के सामने आने के बाद गांव में चर्चा का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि विकास कार्यों में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ सही तरीके से आम लोगों तक पहुंच सके।

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