मुजफ्फरनगर। भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा दुर्लभ पांडुलिपि धरोहरों के संरक्षण की दिशा में चलाए जा रहे “ज्ञान भारतम मिशन” के अंतर्गत शुक्रवार को बुढाना स्थित श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में संरक्षित लगभग 106 वर्ष पुराने ताम्रपत्र का सर्वेक्षण एवं सूचीकरण किया गया।जिलाधिकारी उमेश मिश्रा के निर्देशन तथा श्री कण्डारकर कमल किशोर देशभूषण के मार्गदर्शन में समिति सदस्य डॉ. राजीव कुमार ने मंदिर पहुंचकर वहां मौजूद पदाधिकारियों को “ज्ञान भारतम मिशन” की विस्तृत जानकारी दी। इस दौरान मंदिर में सुरक्षित रखे गए संवत 1976 फाल्गुन बद्दी 5 के प्राचीन ताम्रपत्र के संबंध में जैन समाज बुढाना के अध्यक्ष महेश जैन और अन्य पदाधिकारियों से जानकारी प्राप्त की गई।अधिकारियों ने बताया कि भारत विश्व की सबसे समृद्ध पांडुलिपि विरासत वाले देशों में शामिल है, जहां करोड़ों प्राचीन पांडुलिपियां विभिन्न भाषाओं और लिपियों में सुरक्षित हैं। इन ग्रंथों में दर्शन, विज्ञान, चिकित्सा, साहित्य, वैदिक परंपरा, गणित, ज्योतिष, वास्तु और भारतीय संस्कृति से जुड़ा अमूल्य ज्ञान समाहित है। देशभर के मंदिरों, मठों, जैन भंडारों, पुस्तकालयों और निजी संग्रहों में संरक्षित यह धरोहर भारतीय सभ्यता की निरंतरता का महत्वपूर्ण प्रमाण मानी जाती है।बताया गया कि भारत सरकार द्वारा केंद्रीय बजट 2025-26 में घोषित “ज्ञान भारतम मिशन” का उद्देश्य देशभर में बिखरी पांडुलिपियों, ताड़पत्रों और दुर्लभ ग्रंथों का संरक्षण, डिजिटलीकरण, दस्तावेजीकरण और वैश्विक स्तर पर प्रचार-प्रसार करना है। मिशन के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।सर्वेक्षण के दौरान मंदिर में संरक्षित ऐतिहासिक अभिलेखों एवं प्राचीन दस्तावेजों के संरक्षण को लेकर भी चर्चा की गई। समिति सदस्यों ने कहा कि ऐसे दुर्लभ ताम्रपत्र और पांडुलिपियां देश की सांस्कृतिक धरोहर हैं, जिनका सुरक्षित संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए अत्यंत आवश्यक है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Join WhatsApp Group