मेरठ। जिला कचहरी परिसर अचानक हिंसा और तनाव का केंद्र बन गया, जब एक मुकदमे की फीस को लेकर शुरू हुआ विवाद खूनी संघर्ष में बदल गया। अधिवक्ताओं और उनके पक्षकारों के बीच हुई मारपीट से पूरे परिसर में अफरा-तफरी मच गई। हालात इतने बिगड़ गए कि पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा, लेकिन आरोप है कि गुस्साए लोगों ने पुलिसकर्मियों के साथ भी धक्का-मुक्की कर दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने 13 नामजद समेत 73 अधिवक्ताओं के खिलाफ विभिन्न गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।जानकारी के अनुसार अग्रिम जमानत से जुड़े एक मामले में अदालत से राहत न मिलने के बाद पक्षकार और अधिवक्ता के बीच फीस वापसी को लेकर विवाद खड़ा हो गया। बताया जाता है कि पहले दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई, लेकिन देखते ही देखते माहौल गर्मा गया और मारपीट शुरू हो गई। आरोप है कि कुछ लोगों को चैंबर के भीतर रोककर उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई। घटना के दौरान ईंट-पत्थर चलने और लात-घूंसों से हमला किए जाने की भी बात सामने आई है।कचहरी परिसर में अचानक मचे हंगामे से वहां मौजूद वादकारी, अधिवक्ता और कर्मचारी दहशत में आ गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार काफी देर तक परिसर में भगदड़ जैसी स्थिति बनी रही। इसी बीच किसी ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपियों की पहचान शुरू की और मामले में कार्रवाई तेज कर दी।सूचना पर पहुंची पुलिस टीम ने जब हालात संभालने का प्रयास किया तो वहां मौजूद कुछ लोगों ने पुलिस के साथ भी अभद्रता की। आरोप है कि सरकारी वाहन के साथ तोड़फोड़ की कोशिश भी की गई। पुलिस ने किसी तरह घायल लोगों को बाहर निकालकर अस्पताल भिजवाया और स्थिति को नियंत्रित किया।दूसरी ओर अधिवक्ताओं का कहना है कि उन पर लगाए जा रहे आरोप एकतरफा हैं। उनका दावा है कि कुछ लोग दबाव बनाने और विवाद करने के इरादे से चैंबर पहुंचे थे, जिसके बाद आत्मरक्षा की स्थिति पैदा हुई। फिलहाल पुलिस दोनों पक्षों के बयान, वायरल वीडियो और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच कर रही है।पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले में हत्या के प्रयास, बलवा, मारपीट, बंधक बनाने और धमकी देने जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। घटना के बाद कचहरी परिसर में अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था कर दी गई है और पूरे मामले पर वरिष्ठ अधिकारी नजर बनाए हुए हैं।