बरेली। जनपद में पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। एक युवक को कथित रूप से दो दिनों तक अवैध रूप से हिरासत में रखकर उससे धन उगाही करने के आरोप में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर विभागीय जांच के आदेश दिए हैं।प्राप्त जानकारी के अनुसार हाफिजगंज थाना क्षेत्र के आसपुर हसन अली गांव निवासी सोमवीर कश्यप ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को शिकायत देकर बताया कि वह एक प्लॉट खरीदने के सिलसिले में प्रॉपर्टी डीलर प्रेम बाबू यादव के संपर्क में था। आरोप है कि प्रॉपर्टी के सौदे के दौरान उसके 10 लाख रुपये हड़प लिए गए। इसके बाद वह अपनी रकम वापस लेने के लिए लगातार संबंधित व्यक्ति के संपर्क में बना रहा।शिकायत के अनुसार 14 मई को जब वह रकम की मांग को लेकर एक ढाबे पर मौजूद था, तभी कुछ पुलिसकर्मी वहां पहुंचे और उसे अपने साथ ले गए। आरोप है कि उसे बारादरी थाना क्षेत्र स्थित एक सरकारी आवास में रखा गया, जहां दो दिनों तक उससे पूछताछ और दबाव बनाया गया। इस दौरान उसे विभिन्न मामलों में फंसाने और जेल भेजने की धमकी भी दी गई।पीड़ित का आरोप है कि बाद में उसे छोड़ने के एवज में 50 हजार रुपये की मांग की गई। परिवार से रुपये मंगाने के बाद ही उसे रिहा किया गया। घटना के बाद उसने पूरे मामले की शिकायत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से की।मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनुराग आर्य ने तत्काल प्रारंभिक जांच कराई। जांच में बारादरी थाने में तैनात मुख्य आरक्षी आशीष मिश्रा, मुख्य आरक्षी राहुल कुमार, आरक्षी सिद्धांत चौधरी तथा आरक्षी आदित्य प्रताप सिंह के खिलाफ लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए।जांच रिपोर्ट मिलने के बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने चारों पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया तथा उनके विरुद्ध विभागीय जांच शुरू करा दी है। साथ ही शिकायत में नामजद प्रॉपर्टी डीलर और अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट कहा है कि पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार, कदाचार अथवा आमजन के उत्पीड़न को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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