मुजफ्फरनगर। तितावी थाना क्षेत्र के ग्राम मांडी स्थित एक फैक्ट्री में बंधक बनाकर श्रमिकों से जबरन काम कराने का मामला सामने आया है। पुलिस, श्रम विभाग और प्रशासन की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर 12 श्रमिकों को मुक्त कराया। इस दौरान दो आरोपितों को गिरफ्तार किया गया, जबकि एक अन्य आरोपित की तलाश जारी है।वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा ने बताया कि सूचना मिली थी कि फैक्ट्री में कुछ लोगों को अवैध रूप से बंद कर उनसे मजदूरी कराई जा रही है। सूचना के बाद पुलिस अधीक्षक ग्रामीण अक्षय संजय महाडीक के नेतृत्व में तितावी पुलिस, एसओजी देहात, श्रम विभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम गठित कर छापा मारा गया।कार्रवाई के दौरान फैक्ट्री से बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, हरियाणा और राजस्थान के 12 श्रमिकों को मुक्त कराया गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि इनमें कुछ नाबालिग भी शामिल हैं और उन्हें करीब एक से डेढ़ वर्ष से बंधक बनाकर रखा गया था।पुलिस ने मौके से शिवा त्यागी और प्रदीप बालियान को गिरफ्तार किया है, जबकि अंकित बालियान फरार बताया गया है। श्रमिकों ने पूछताछ में बताया कि उन्हें 10 से 12 हजार रुपये मासिक वेतन, भोजन और रहने की सुविधा का लालच देकर फैक्ट्री में लाया गया था। यहां पहुंचने के बाद न तो वेतन दिया गया और न ही बाहर जाने की अनुमति।मुक्त कराए गए श्रमिकों के अनुसार उनसे चौबीस घंटे काम कराया जाता था और दिन में केवल एक बार सूखी रोटी दी जाती थी। वेतन मांगने या फैक्ट्री छोड़ने की बात करने पर रॉड और डंडों से मारपीट की जाती थी। बीमार पड़ने पर भी किसी प्रकार की चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जाती थी।पूछताछ में गिरफ्तार आरोपितों ने स्वीकार किया कि रेलवे स्टेशनों और सार्वजनिक स्थानों से रोजगार की तलाश कर रहे मजदूरों को बहला-फुसलाकर लाया जाता था। पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस कार्रवाई को अंजाम देने वाली टीम को 25 हजार रुपये के पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

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