शोपियां (जम्मू-कश्मीर)। दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले में सुरक्षाबलों को आतंकवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में बड़ी सफलता मिली है। चनापोरा क्षेत्र में पिछले पांच दिनों से जारी संयुक्त अभियान के दौरान प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का कमांडर जाकिर अहमद गनी मारा गया। बुधवार सुबह सुरक्षाबलों ने उसका शव बरामद कर लिया। वहीं, एक अन्य आतंकी लतीफ भट की तलाश में सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल का संयुक्त अभियान लगातार जारी है।सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार शनिवार को खुफिया सूचना मिली थी कि चनापोरा क्षेत्र के बागों और आसपास के इलाके में दो आतंकी छिपे हुए हैं। इसके बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस के विशेष अभियान दल, राष्ट्रीय राइफल्स और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल ने पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू किया। हाल ही में सामने आए एक सीसीटीवी फुटेज में जाकिर गनी और लतीफ भट एक साथ दिखाई दिए थे, जिसके आधार पर अभियान को और तेज किया गया। आतंकियों के संभावित भागने के रास्तों को भी पूरी तरह सील कर दिया गया।सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार जाकिर अहमद गनी कुलगाम जिले के मतलहामा गांव का निवासी था और वर्ष 2023 से दक्षिण कश्मीर में सक्रिय था। वर्ष 2024 में वह लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा था। उसके खिलाफ राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की अदालत से गैर-जमानती वारंट भी जारी हो चुका था। वर्ष 2026 में पहलगाम आतंकी हमले की जांच के दौरान भी उसका नाम सामने आया था। इसी के बाद उसे घाटी के 14 मोस्ट वांटेड स्थानीय आतंकियों की सूची में शामिल किया गया था।अधिकारियों का कहना है कि जाकिर गनी के मारे जाने के बाद मोस्ट वांटेड सूची में शामिल 14 स्थानीय आतंकियों में से नौ को सुरक्षाबल विभिन्न अभियानों में मार गिरा चुके हैं। अब सूची में शामिल शेष पांच आतंकियों की तलाश तेज कर दी गई है। इनमें लतीफ भट भी शामिल है, जिसकी शोपियां के चनापोरा क्षेत्र में मौजूदगी की आशंका के चलते अभियान लगातार जारी है।सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद घाटी में आतंकियों के नेटवर्क और उनके सहयोगियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। हाल के महीनों में कई बड़े अभियानों के माध्यम से आतंकवादी संगठनों के नेटवर्क को कमजोर करने की कार्रवाई की गई है। अधिकारियों के अनुसार क्षेत्र में तलाशी अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक सभी संदिग्ध स्थानों की पूरी तरह जांच नहीं हो जाती।