लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सभी ब्लॉक प्रमुखों और क्षेत्र पंचायतों का पांच वर्षीय कार्यकाल रविवार को समाप्त हो गया। नई क्षेत्र पंचायतों के गठन और ब्लॉक प्रमुखों के चुनाव होने तक पंचायतों के प्रशासनिक कार्यों में किसी प्रकार की बाधा न आए, इसके लिए सरकार अंतरिम व्यवस्था करने जा रही है। शासन स्तर पर मौजूदा ब्लॉक प्रमुखों को प्रशासक नियुक्त करने की तैयारी पूरी कर ली गई है।सूत्रों के अनुसार, इस संबंध में आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है और शासन की ओर से आदेश जारी किए जाने की संभावना है। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि क्षेत्र पंचायतों के नियमित कार्य बिना किसी रुकावट के जारी रहें और विकास योजनाओं का संचालन प्रभावित न हो।प्रशासक नियुक्त होने के बाद क्षेत्र पंचायतों में चल रहे विकास कार्य, वित्तीय स्वीकृतियां, निर्माण कार्यों की निगरानी तथा अन्य प्रशासनिक गतिविधियां पूर्व की भांति संचालित होती रहेंगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में चल रही योजनाओं के क्रियान्वयन पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।पंचायती राज व्यवस्था के तहत निर्धारित पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के बाद अब नई क्षेत्र पंचायतों के गठन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके बाद नियमानुसार ब्लॉक प्रमुखों के चुनाव कराए जाएंगे और निर्वाचित प्रतिनिधियों के कार्यभार ग्रहण करने तक प्रशासक व्यवस्था लागू रहेगी।शासन का मानना है कि इस अंतरिम व्यवस्था से प्रशासनिक निरंतरता बनी रहेगी और ग्रामीण विकास से जुड़े कार्यों में किसी प्रकार का व्यवधान नहीं आएगा। चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद नव निर्वाचित ब्लॉक प्रमुख क्षेत्र पंचायतों की जिम्मेदारी संभालेंगे।