मुजफ्फरनगर (नव जागरण पोस्ट)। साइबर ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में घुमाकर उसका स्रोत छिपाने वाले गिरोह का साइबर अपराध थाना पुलिस ने पर्दाफाश किया है। आरोपित पेट्रोल पंप संचालकों से किसी न किसी बहाने उनका क्यूआर कोड हासिल करते थे। इसके बाद साइबर ठगी से मिली रकम पेट्रोल पंप के खाते में मंगाकर उसे नकद निकलवाते और कमीशन काटने के बाद रकम दूसरे बैंक खातों में पहुंचा देते थे। पुलिस ने मामले में दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है।पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई फर्जी आयुर्वेदिक और शक्तिवर्धक दवाओं के नाम पर की गई साइबर ठगी की जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर की गई। जांच में पता चला कि गिरोह के सदस्य ठगी की रकम को सीधे अपने खातों में रखने के बजाय पेट्रोल पंपों के क्यूआर कोड का इस्तेमाल कर उसे दूसरे खातों तक पहुंचाते थे।पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपित पेट्रोल पंपों पर पहुंचकर संचालकों या कर्मचारियों को अपनी मजबूरी बताकर क्यूआर कोड हासिल कर लेते थे। इसके बाद क्यूआर कोड अपने साथियों को भेज दिया जाता था। गिरोह के अन्य सदस्य इसी क्यूआर कोड के माध्यम से साइबर ठगी की रकम पेट्रोल पंप के खाते में भेजते थे।ठगी की रकम खाते में पहुंचने के बाद आरोपित पेट्रोल पंप कर्मचारियों से नकदी निकलवा लेते थे। इसके बाद तय कमीशन अपने पास रखकर शेष रकम गिरोह के सदस्यों की ओर से बताए गए अलग-अलग बैंक खातों में जमा या स्थानांतरित कर दी जाती थी। इस तरीके से रकम का वास्तविक स्रोत छिपाने का प्रयास किया जाता था।पुलिस को जांच में बैंक खाते उपलब्ध कराने और फर्जी व कूटरचित आधार कार्ड के इस्तेमाल के साक्ष्य भी मिले हैं। गिरफ्तार आरोपितों के कब्जे से तीन मोबाइल फोन और एक फर्जी आधार कार्ड बरामद किया गया है। पुलिस अब बरामद मोबाइल और दस्तावेजों की मदद से गिरोह के अन्य सदस्यों तथा उनसे जुड़े बैंक खातों की जानकारी जुटा रही है।गिरफ्तार आरोपितों की पहचान अर्पित कुमार पुत्र स्वर्गीय नरेन्द्र सिंह निवासी किरठल, थाना रमाला, जनपद बागपत और आकाश पुत्र ब्रजपाल सिंह निवासी रेवारा, थाना कवरई, जनपद महोबा के रूप में हुई है।साइबर अपराध थाना मुजफ्फरनगर में मामले में मुकदमा संख्या 33/2026 दर्ज है। पुलिस ने दोनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 336(3), 340(2), 317(4) और 3(5) के तहत कार्रवाई की है।पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है। यह पता लगाया जा रहा है कि साइबर ठगी की रकम कितने पेट्रोल पंपों के क्यूआर कोड के माध्यम से मंगाई गई और बाद में किन-किन बैंक खातों में पहुंचाई गई। साथ ही बैंक खाते उपलब्ध कराने और फर्जी आधार कार्ड तैयार कराने वालों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।कार्रवाई करने वाली टीम में साइबर अपराध थाना प्रभारी निरीक्षक कर्मवीर सिंह, उपनिरीक्षक पंकज सिंह, उपनिरीक्षक धर्मराज यादव, मुख्य आरक्षी बालकिशन और आरक्षी राहुल कुमार शामिल रहे।