मुजफ्फरनगर। दिल्ली-देहरादून नेशनल हाईवे स्थित बिलासपुर कट पर संचालित ‘होटल वेल विस्टा’ में राज्य वस्तु एवं सेवा कर (एसजीएसटी) की विशेष जांच शाखा (एसआईबी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए टैक्स चोरी के एक संगठित नेटवर्क का खुलासा किया है। करीब 15 घंटे तक चली इस सघन छापेमारी में विभाग को करोड़ों रुपये के अघोषित कारोबार के पुख्ता साक्ष्य मिले हैं, जिससे जिले के व्यापारिक जगत में हड़कंप की स्थिति बन गई है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, होटल की वास्तविक आय और जीएसटी रिटर्न में भारी अंतर को लेकर लंबे समय से इनपुट मिल रहे थे। इसी के आधार पर संयुक्त आयुक्त सिद्धेशचंद दीक्षित के निर्देश पर उपायुक्त मनोज कुमार शुक्ला के नेतृत्व में विशेष जांच दल का गठन किया गया। टीम ने पूरी गोपनीयता बरतते हुए अचानक होटल में दबिश दी, जिससे प्रबंधन को दस्तावेजों में हेरफेर या उन्हें छिपाने का मौका नहीं मिल पाया।
जांच के दौरान अधिकारियों के हाथ ऐसे दस्तावेज लगे, जिन्होंने टैक्स चोरी की पूरी प्रणाली को उजागर कर दिया। पता चला कि होटल में आयोजित होने वाले भव्य विवाह समारोह, पार्टियों और अन्य बड़े आयोजनों की बुकिंग बिना किसी आधिकारिक बिल के की जा रही थी। करोड़ों रुपये का लेनदेन ‘कच्चे पर्चों’ पर दर्ज कर जीएसटी से बचने की कोशिश की जा रही थी। प्रारंभिक जांच में लगभग 3 करोड़ रुपये का अघोषित टर्नओवर सामने आया है, जिस पर करीब 54 लाख रुपये की टैक्स चोरी पकड़ी गई है। अधिकारियों का मानना है कि विस्तृत जांच के बाद यह आंकड़ा और अधिक बढ़ सकता है।
कार्रवाई के दौरान एसआईबी टीम ने होटल के अकाउंट्स सेक्शन को अपने कब्जे में लेकर कंप्यूटर सिस्टम, महत्वपूर्ण हार्ड ड्राइव और बुकिंग रजिस्टर जब्त कर लिए। डिजिटल डेटा की जांच में कई ऐसे लेनदेन सामने आए हैं, जिनमें जीएसटी इनवॉइस जारी नहीं किए गए थे। साथ ही कैटरिंग सेवाओं और होटल में ठहरने से होने वाली आय को भी रिटर्न में पूरी तरह प्रदर्शित नहीं किया गया था।
इस कार्रवाई के बाद नई मंडी थाना क्षेत्र समेत हाईवे पर स्थित अन्य होटल और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में भी ‘रेड’ का खौफ दिखाई दे रहा है। चर्चाएं हैं कि विभाग की नजर अब शहर के अन्य बड़े संस्थानों पर भी है और जल्द ही वहां भी कार्रवाई हो सकती है।
उपायुक्त मनोज कुमार शुक्ला ने बताया कि जब्त किए गए दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की गहन जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी, जिसके आधार पर भारी जुर्माना और सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
