मुजफ्फरनगर। औद्योगिक क्षेत्र में मंगलवार सुबह उस समय हलचल मच गई, जब राज्य जीएसटी विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा (SIB) ने चर्चित उद्योगपति एवं पूर्व विधायक नूर सलीम राणा से संबंधित अमन रोलिंग मिल पर अचानक छापेमारी कर दी। कार्रवाई इतनी गोपनीय तरीके से की गई कि मिल प्रबंधन को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
सूत्रों के मुताबिक, विभाग को लंबे समय से इनपुट मिल रहे थे कि मिल से बड़े पैमाने पर माल की सप्लाई बिना वैध ई-वे बिल के की जा रही है। आरोप यह भी है कि जांच से बचने के लिए पहले से निगरानी कर विभागीय टीमों की गतिविधियों पर नजर रखी जाती थी। इन सूचनाओं के आधार पर SIB ने योजनाबद्ध तरीके से एक साथ टीम भेजकर पूरे परिसर को अपने नियंत्रण में ले लिया।
टीम के पहुंचते ही मिल के सभी प्रवेश और निकास द्वार बंद करा दिए गए और भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। अंदर मौजूद कर्मचारियों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए, ताकि किसी प्रकार की सूचना बाहर न जा सके। बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया, जिससे जांच बिना किसी व्यवधान के जारी रह सके।
अधिकारियों द्वारा मिल के कंप्यूटर सिस्टम, पिछले छह महीनों के खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड, ई-वे बिल और बैंक लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों की गहन पड़ताल की जा रही है। प्रारंभिक जांच में भौतिक स्टॉक और कागजी अभिलेखों के बीच अंतर मिलने की आशंका जताई जा रही है। स्टॉक के सत्यापन और रिकॉर्ड मिलान की प्रक्रिया लंबी होने के कारण कार्रवाई देर रात तक चलने की संभावना व्यक्त की जा रही है।
राजनीतिक दृष्टि से भी यह कार्रवाई काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि नूर सलीम राणा जिले की राजनीति में प्रभावशाली माने जाते हैं और पूर्व में चरथावल विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। ऐसे में इस स्तर की छापेमारी ने अन्य उद्योगपतियों और कारोबारी वर्ग में भी हलचल पैदा कर दी है।
फिलहाल विभाग की ओर से टैक्स चोरी की वास्तविक राशि का आधिकारिक खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि जांच पूरी होने पर बड़े पैमाने पर राजस्व अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है। SIB ने संकेत दिए हैं कि दोष सिद्ध होने पर संबंधित पक्षों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
