नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रमणि को देश का नया प्रमुख रक्षा अध्यक्ष नियुक्त किया है। वह वर्तमान प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान का स्थान लेंगे, जिनका कार्यकाल 30 मई को समाप्त हो रहा है। सरकार की ओर से जारी आदेश के अनुसार वह पदभार ग्रहण करने के साथ ही सैन्य मामलों के विभाग में सचिव की जिम्मेदारी भी संभालेंगे।रक्षा मंत्रालय ने लेफ्टिनेंट जनरल राजा सुब्रमणि को चार दशक से अधिक सैन्य अनुभव वाला अत्यंत कुशल और सम्मानित अधिकारी बताया है। वर्तमान में वह राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में सैन्य सलाहकार के रूप में कार्यरत हैं। इससे पहले वह सेना के उप प्रमुख तथा केंद्रीय कमान के प्रमुख पद पर भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। इसके अलावा पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं पर कई महत्वपूर्ण सैन्य इकाइयों का नेतृत्व भी कर चुके हैं।लेफ्टिनेंट जनरल राजा सुब्रमणि ने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी से सैन्य जीवन की शुरुआत की थी। दिसंबर 1985 में उन्हें गढ़वाल राइफल्स में कमीशन मिला। इसके बाद उन्होंने सेना में अनेक महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए रणनीतिक और परिचालन स्तर पर अपनी जिम्मेदारियां निभाईं। उन्होंने ब्रिटेन के सैन्य प्रशिक्षण संस्थान में उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्राप्त किया और बाद में नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय में अध्ययन किया।उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी काफी मजबूत मानी जाती है। उन्होंने लंदन के किंग्स कॉलेज से कला विषय में परास्नातक की डिग्री प्राप्त की, जबकि मद्रास विश्वविद्यालय से रक्षा अध्ययन में एमफिल किया। अपने लंबे सैन्य करियर के दौरान उन्होंने कई संवेदनशील क्षेत्रों और संघर्ष प्रभावित इलाकों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वह कजाकिस्तान स्थित भारतीय दूतावास में रक्षा प्रतिनिधि के रूप में भी भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।सेना मुख्यालय में उन्होंने सहायक सैन्य सचिव और पूर्वी कमान में संचालन संबंधी महत्वपूर्ण दायित्व संभाले। जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रीय राइफल्स के उप कमांडर के रूप में भी उन्होंने सेवाएं दीं। राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य सेवाओं में उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें परम विशिष्ट सेवा पदक, अति विशिष्ट सेवा पदक, सेना पदक और विशिष्ट सेवा पदक जैसे अनेक सम्मान प्रदान किए जा चुके हैं।रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि लेफ्टिनेंट जनरल राजा सुब्रमणि का अनुभव और नेतृत्व क्षमता देश की तीनों सेनाओं के संयुक्त संचालन को और अधिक मजबूत बनाएगी तथा बदलते वैश्विक सुरक्षा हालात में भारत की सैन्य रणनीति को नई दिशा मिलेगी।