कानपुर। देशभर में लोगों को “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाकर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले हाईटेक साइबर गिरोह का कानपुर पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। पनकी थाना पुलिस और पश्चिम जोन साइबर सेल की संयुक्त कार्रवाई में गिरोह के दो सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क अब तक करीब 10 करोड़ रुपये की साइबर ठगी को अंजाम दे चुका है। एक बैंक खाते से ही 3.25 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन मिलने के बाद जांच एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं।पुलिस अधिकारियों के मुताबिक आरोपी बेहद शातिर तरीके से लोगों को अपना निशाना बनाते थे। पहले अनजान नंबरों से फोन कर खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या अन्य केंद्रीय एजेंसियों का अधिकारी बताते थे। इसके बाद पीड़ित को किसी फर्जी आपराधिक मामले, मनी लॉन्ड्रिंग या पार्सल स्कैम में फंसाने की बात कहकर डराया जाता था। आरोपी वीडियो कॉल के जरिए नकली पुलिस स्टेशन जैसा माहौल बनाकर लोगों को मानसिक दबाव में लेते थे और गिरफ्तारी से बचाने के नाम पर मोटी रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करा लेते थे।पुलिस उपायुक्त पश्चिम एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान जगदीशचंद्र गुप्ता और रोहित भसीन के रूप में हुई है। दोनों लंबे समय से साइबर ठगी के इस नेटवर्क को संचालित कर रहे थे। पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच में सामने आया कि गिरोह को बैंकिंग सिस्टम के भीतर से भी मदद मिल रही थी। नोएडा स्थित एक निजी बैंक के कुछ कर्मचारियों की सहायता से फर्जी और किराए के बैंक खाते खुलवाए जाते थे, जिनका इस्तेमाल ठगी की रकम इधर-उधर करने में किया जाता था।पुलिस जांच में बैंक के शाखा प्रबंधक मुकुल वर्मा और डिप्टी मैनेजर धीरज के नाम भी सामने आए हैं। दोनों को गुजरात पुलिस पहले ही इसी तरह के मामलों में गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। आरोप है कि गिरोह बैंक कर्मचारियों की मदद से खातों की ट्रांजैक्शन लिमिट बढ़वाता था ताकि करोड़ों रुपये का लेनदेन आसानी से हो सके और किसी को शक न हो।जांच एजेंसियों को पता चला है कि इस साइबर नेटवर्क का जाल उत्तर प्रदेश के अलावा गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु समेत कई राज्यों तक फैला हुआ था। पुलिस को आरोपियों के पास से 16 मोबाइल नंबरों की जानकारी मिली है, जिनका इस्तेमाल अलग-अलग राज्यों में विभिन्न भाषाओं में लोगों को ठगने के लिए किया जाता था। आरोपी नकली पहचान पत्र, फर्जी सरकारी नोटिस और एजेंसियों के लोगो का इस्तेमाल कर लोगों को भ्रमित करते थे।पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार जगदीशचंद्र गुप्ता पहले भी आपराधिक मामलों में जेल जा चुका है, जबकि रोहित भसीन कई राज्यों की साइबर सेल के निशाने पर था। अब पुलिस इस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों और उनके विदेशी संपर्कों की भी जांच कर रही है।साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी कॉल या वीडियो कॉल पर खुद को सरकारी अधिकारी बताकर पैसे मांगने वालों पर भरोसा न करें और ऐसी स्थिति में तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या स्थानीय पुलिस से संपर्क करें।

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