नई दिल्ली। देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था में लंबित मामलों के बढ़ते बोझ को कम करने और न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने संबंधी अध्यादेश को मंजूरी प्रदान कर दी है। इस निर्णय के बाद अब सर्वोच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश सहित कुल 38 न्यायाधीश कार्यरत हो सकेंगे।सरकार का मानना है कि न्यायाधीशों की संख्या बढ़ने से वर्षों से लंबित मामलों की सुनवाई में तेजी आएगी और आम लोगों को समय पर न्याय उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी। न्यायालयों में लगातार बढ़ते मामलों और बढ़ते कार्यभार को देखते हुए लंबे समय से इस प्रकार के निर्णय की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।केंद्र सरकार की ओर से बताया गया कि सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों के स्वीकृत पदों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूर किया गया था। इसके बाद अध्यादेश जारी कर इसे लागू करने की प्रक्रिया पूरी की गई। सरकार का कहना है कि न्यायपालिका की कार्यक्षमता बढ़ाने और न्याय वितरण प्रणाली को अधिक मजबूत बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।देश में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या निर्धारित करने से संबंधित कानून वर्ष 1956 में लागू किया गया था। समय-समय पर न्यायिक जरूरतों और मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए इसमें संशोधन किए जाते रहे हैं। इससे पहले वर्ष 2019 में भी न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि की गई थी।कानूनी जानकारों का मानना है कि नए पद सृजित होने से सुनवाई की प्रक्रिया में तेजी आएगी, महत्वपूर्ण मामलों का शीघ्र निस्तारण हो सकेगा और न्याय व्यवस्था पर बढ़ते दबाव को कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही आम नागरिकों को भी लंबे इंतजार से राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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