मुजफ्फरनगर। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर दोस्ती कर ऑनलाइन निवेश के नाम पर लोगों को करोड़ों रुपये का चूना लगाने वाले अंतरराज्यीय साइबर ठग गिरोह के खिलाफ साइबर क्राइम थाना पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने गिरोह के एक और शातिर सदस्य को गिरफ्तार करते हुए उसके कब्जे से दो मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, नौ एटीएम कार्ड, तीन चेकबुक, 24 चेक और नगदी बरामद की है।वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा के निर्देशन में चलाए गए अभियान के तहत साइबर थाना पुलिस ने यह कार्रवाई की। पुलिस ने पीड़ित से ठगी गई धनराशि में से लगभग 23 लाख रुपये फ्रीज कराकर वापस दिलाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। इससे पूर्व इसी मामले में गिरोह के एक अन्य सदस्य को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।गिरफ्तार आरोपी की पहचान मोहम्मद आकिब अली निवासी अलीगढ़ के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार उसका बहनोई फुजैल उर्फ फैजूल सहित गिरोह के अन्य सदस्य अभी फरार हैं, जिनकी तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह साइबर नेटवर्क कई राज्यों में सक्रिय होकर लोगों को निवेश के नाम पर ठगने का काम कर रहा था।एसपी क्राइम इन्दु सिद्धार्थ ने बताया कि पीड़ित को फेसबुक पर “गीतिका कपूर उर्फ जीजी” नाम की प्रोफाइल से फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी गई थी। बातचीत के दौरान आरोपी पक्ष ने भरोसा जीतते हुए ऑनलाइन ट्रेडिंग और निवेश में भारी मुनाफे का झांसा दिया। इसके बाद पीड़ित को एक फर्जी वेबसाइट पर निवेश के लिए प्रेरित किया गया।ठगों ने पीड़ित को व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़कर नकली लाभ दिखाया और अलग-अलग बैंक खातों में कुल 1 करोड़ 1 लाख 2 हजार रुपये जमा करा लिए। जब पीड़ित ने अपनी रकम वापस निकालने का प्रयास किया तो आरोपियों ने “फाइनल वेरिफिकेशन”, “डेटा रिपेयरिंग” और “एंटी मनी लॉन्ड्रिंग प्रोसेस” जैसे बहाने बनाकर उससे और रकम जमा कराने का दबाव बनाया।पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि गिरोह देहरादून स्थित एक फ्लैट से अपना नेटवर्क संचालित कर रहा था। आरोपी विभिन्न बैंक खातों में रकम मंगवाकर एटीएम कार्ड और चेक के माध्यम से पैसे निकालते थे। जांच के दौरान आरोपी से जुड़े छह बैंक खातों पर देश के 13 राज्यों से कुल 21 शिकायतें दर्ज मिलीं, जिनमें लगभग 57.96 लाख रुपये की साइबर ठगी की पुष्टि हुई है।साइबर थाना पुलिस अब गिरोह के फरार सदस्यों की तलाश में जुटी हुई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए विभिन्न राज्यों की एजेंसियों से भी संपर्क किया जा रहा है।