मुजफ्फरनगर(आकाश तायल)। खतौली कस्बे के बड़ा बाजार स्थित ठाकुरद्वारा परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं के भावपूर्ण वर्णन से भक्तिरस में सराबोर नजर आए। कथा व्यास नमन कृष्ण महाराज ने माखन चोरी, कालिया मर्दन, मटकी फोड़, चीरहरण और गोवर्धन पूजा जैसे प्रसंगों का आध्यात्मिक महत्व बताते हुए श्रद्धालुओं को अहंकार त्याग, समर्पण और निष्काम भक्ति का संदेश दिया। इस दौरान गोवर्धन महाराज को छप्पन भोग अर्पित कर श्रद्धाभाव से पूजा-अर्चना की गई।कथा व्यास ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की माखन चोरी लीला केवल बाल क्रीड़ा नहीं, बल्कि गहरा आध्यात्मिक संदेश समेटे हुए है। उन्होंने बताया कि माखन मनुष्य की शुद्ध आत्मा का प्रतीक है, जो जीवन रूपी मंथन के बाद प्राप्त होती है। जब व्यक्ति अपने भीतर के अहंकार और द्वेष को त्यागकर स्वयं को प्रभु चरणों में समर्पित करता है, तभी उसे ईश्वर प्रेम और आत्मिक आनंद की अनुभूति होती है। उन्होंने गोपियों द्वारा ऊंचाई पर मटकियां लटकाने के प्रसंग को भी अहंकार का प्रतीक बताते हुए कहा कि प्रभु कृपा पाने के लिए मनुष्य को अपने अहंकार रूपी ऊंचे स्थान से नीचे उतरना पड़ता है।कालिया मर्दन प्रसंग का वर्णन करते हुए नमन कृष्ण महाराज ने कहा कि यह लीला भय और अहंकार पर विजय का प्रतीक है। भगवान श्रीकृष्ण ने यमुना में आतंक फैला रहे कालिया नाग का दमन कर ब्रजवासियों को भयमुक्त किया। यह प्रसंग व्यक्ति को साहस, विश्वास और ईश्वर के प्रति अटूट श्रद्धा का संदेश देता है। वहीं मटकी फोड़ लीला को आत्मचिंतन से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि जब तक मनुष्य अपने भीतर के अहंकार रूपी पात्र को नहीं तोड़ता, तब तक उसे परमात्मा के प्रेम और ज्ञान की अनुभूति नहीं हो सकती।गोवर्धन लीला का वर्णन करते हुए कथा व्यास ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र के अभिमान को समाप्त कर यह संदेश दिया कि प्रकृति, गौसेवा और जीवन के मूल आधारों के प्रति कृतज्ञता ही सच्ची पूजा है।

उन्होंने कहा कि जब इंद्र के क्रोध से ब्रज में प्रलयंकारी वर्षा हुई, तब भगवान कृष्ण ने अपनी कनिष्ठा अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर समस्त ब्रजवासियों की रक्षा की। यह प्रसंग बताता है कि ईश्वर के समक्ष किसी भी प्रकार का अभिमान टिक नहीं सकता और सच्ची भक्ति केवल निष्कपट प्रेम व पूर्ण समर्पण से प्राप्त होती है।कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन के साथ भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का आनंद लिया। आयोजन में मुख्य आयोजक डॉ. दिनेश चंद्र के साथ डॉ. जयश्री द्विवेदी, डॉ. तनु शर्मा, डॉ. शिवम शर्मा, डॉ. एन.के. त्यागी, रजनीश, बबलू, बिल्लू, प्रवीण प्रधान, पूनम तायल, कुलदीप त्यागी और निशांक सहित अनेक श्रद्धालुओं ने व्यवस्थाओं में सहयोग किया। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर धर्मलाभ प्राप्त किया।