मुजफ्फरनगर(आकाश तायल)। खतौली बड़ा बाजार स्थित ठाकुरद्वारा परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर नजर आए। कथा व्यास नमन कृष्ण महाराज ने महारास लीला, गोपी गीत और उद्धव-गोपी संवाद का भावपूर्ण वर्णन करते हुए भक्तों को निष्काम प्रेम और पूर्ण समर्पण का संदेश दिया। कथा श्रवण के दौरान पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण से गुंजायमान रहा।कथा व्यास ने कहा कि महारास लीला केवल नृत्य या उत्सव का प्रतीक नहीं, बल्कि जीवात्मा और परमात्मा के दिव्य मिलन का आध्यात्मिक स्वरूप है। उन्होंने बताया कि गोपियों का प्रेम पूर्णतः निष्काम, निर्मल और अहंकार रहित था, जिसमें सांसारिक मोह और वासनाओं का कोई स्थान नहीं था। भगवान श्रीकृष्ण ने महारास के माध्यम से यह संदेश दिया कि जब भक्त सच्चे मन से प्रभु की शरण में आता है, तब ईश्वर स्वयं उसके जीवन में प्रकट होते हैं।नमन कृष्ण महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत में वर्णित महारास लीला का श्रवण और स्मरण मन के विकारों को समाप्त कर आत्मा को प्रेममयी भक्ति की ओर अग्रसर करता है। उन्होंने गोपी गीत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के अंतर्धान होने पर विरह व्यथा में डूबी गोपियों द्वारा गाया गया गोपी गीत पराभक्ति और समर्पण का सर्वोच्च उदाहरण है। इसमें जीवात्मा की परमात्मा से मिलने की तीव्र तड़प और आत्मिक प्रेम का अद्भुत भाव दिखाई देता है।उद्धव-गोपी संवाद का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि जब भगवान श्रीकृष्ण के संदेशवाहक बनकर उद्धव ब्रज पहुंचे तो गोपियों की अनन्य भक्ति के आगे उनका ज्ञान और अहंकार भी फीका पड़ गया। गोपियों ने स्पष्ट कहा कि उनका मन तो पहले ही श्रीकृष्ण के चरणों में समर्पित हो चुका है, इसलिए उनके लिए ज्ञान से अधिक प्रेम और भक्ति का मार्ग महत्वपूर्ण है।कथा आयोजन की व्यवस्थाओं में मुख्य आयोजक डॉ. दिनेश चंद्र के साथ डॉ. जयश्री द्विवेदी, डॉ. तनु शर्मा, डॉ. शिवम शर्मा, डॉ. एन.के. त्यागी, रजनीश, बबलू, बिल्लू, प्रवीण प्रधान, कुलदीप त्यागी और निशांक सहित अनेक श्रद्धालुओं का सहयोग रहा।

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