मुजफ्फरनगर। जनपद में लंबे समय तक आतंक का पर्याय रहे तितावी क्षेत्र के कुख्यात अपराधी उपेन्द्र को करीब ढाई दशक पुराने गैंगस्टर एक्ट मामले में अदालत ने दोषी करार देते हुए तीन वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही न्यायालय ने दोषी पर 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने पर एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (कोर्ट संख्या-5) एवं विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट श्रीमती रेखा सिंह की अदालत ने मंगलवार को यह फैसला सुनाया। अभियोजन पक्ष के अनुसार थाना तितावी क्षेत्र के गांव धनसैनी निवासी उपेन्द्र पुत्र धर्मपाल सिंह ने अपने साथी सलीम के साथ मिलकर वर्ष 2000 में एक संगठित आपराधिक गिरोह बना रखा था। गिरोह पर हथियारों के बल पर रंगदारी वसूलने, राहगीरों व व्यापारियों को धमकाने और क्षेत्र में भय का माहौल पैदा करने के आरोप थे।पुलिस जांच में सामने आया था कि गिरोह के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास और अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज रहे हैं। सुनवाई के दौरान मुख्य गवाह वीरेन्द्र सिंह ने अदालत को बताया कि वर्ष 1999 में उसके भाई सुरेन्द्र की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। आरोप था कि सलीम के उकसाने पर उपेन्द्र ने तमंचे से फायर किया था। इस हत्या प्रकरण में दोनों आरोपियों को पूर्व में दोषी ठहराया जा चुका है।गवाह ने यह भी बयान दिया कि मुकदमे की पैरवी के दौरान कचहरी परिसर में दोनों आरोपियों ने उसे जान से मारने की धमकी दी थी। अभियोजन पक्ष ने अदालत से कहा कि अभियुक्त का आपराधिक इतिहास क्षेत्र में दहशत का कारण बना रहा है, इसलिए कठोर सजा दी जानी चाहिए। वहीं बचाव पक्ष ने पारिवारिक परिस्थितियों का हवाला देकर नरमी की मांग की।दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने उपेन्द्र को दोषी मानते हुए तीन वर्ष की सजा सुनाई। फैसले के बाद दोषी को न्यायिक अभिरक्षा में जिला कारागार भेज दिया गया। सह-अभियुक्त सलीम की पत्रावली पहले ही अलग की जा चुकी है, जिस पर अलग से सुनवाई जारी है।