हमीरपुर। बेतवा नदी पर निर्माणाधीन पुल तड़के दर्दनाक हादसे का शिकार हो गया। तेज आंधी-तूफान के बीच पुल के एक हिस्से की स्लैब और शटरिंग अचानक गिरने से वहां कार्यरत मजदूर मलबे में दब गए। हादसे में छह मजदूरों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य श्रमिकों के मलबे में फंसे होने की आशंका के चलते राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है।घटना ललपुरा थाना क्षेत्र की है, जहां बेतवा नदी पर मोरकांदर और कंडोर गांवों के बीच पुल का निर्माण कार्य चल रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शुक्रवार तड़के करीब तीन बजे क्षेत्र में तेज आंधी और बारिश के साथ मौसम अचानक बिगड़ गया। इसी दौरान पुल के निर्माणाधीन हिस्से की शटरिंग और स्लैब भरभराकर नीचे आ गिरी। देखते ही देखते निर्माण स्थल पर चीख-पुकार मच गई और मजदूर जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों में हड़कंप मच गया। स्थानीय पुलिस, राजस्व विभाग की टीमों तथा एसडीआरएफ को तत्काल मौके पर भेजा गया। बचाव दलों ने मलबा हटाने का कार्य शुरू किया और दबे हुए मजदूरों की तलाश में अभियान चलाया।पुलिस के अनुसार हादसे में बांदा जनपद निवासी लोकेन्द्र, कुलदीप और सावंत यादव सहित ललपुरा क्षेत्र के पुष्पेंद्र सिंह, राजेश पाल तथा एक अन्य मजदूर की जान चली गई। वहीं अवधेश, कल्लू, राजेश समेत कई श्रमिकों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।जानकारी के मुताबिक बेतवा नदी पर यह पुल क्षेत्रीय संपर्क व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से बनाया जा रहा था। करीब दो वर्ष पूर्व शुरू हुई इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। हादसे के बाद निर्माण कार्य में बरती गई सुरक्षा व्यवस्थाओं और तकनीकी मानकों को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।जिलाधिकारी, पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी तथा अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचकर राहत कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। प्रशासन ने हादसे की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। वहीं मृतकों के परिजनों में शोक की लहर है और पूरे क्षेत्र में घटना को लेकर गहरा दुख व्याप्त है।प्रशासन का कहना है कि बचाव अभियान पूरा होने के बाद हादसे के वास्तविक कारणों की विस्तृत जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।