मुजफ्फरनगर। किसानों के लिए सरकारी अनुदान पर उपलब्ध कराई जाने वाली यूरिया खाद की बड़े पैमाने पर कालाबाजारी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। थाना जानसठ पुलिस और एसओजी देहात की संयुक्त कार्रवाई में गिरोह के आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने उनके कब्जे से 20,430 किलोग्राम अनुदानित यूरिया, चार वाहन और फर्जी बिल बरामद किए हैं। बरामद माल की अनुमानित कीमत करीब 60 लाख रुपये बताई गई है।वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय वर्मा ने बताया कि कवाल पुल के पास वाहन चेकिंग के दौरान मुखबिर से सूचना मिली थी कि एक कार में सवार दो व्यक्ति पीछे चल रहे यूरिया से भरे वाहनों की निगरानी कर रहे हैं और रास्ते की जानकारी दे रहे हैं। सूचना के आधार पर थाना जानसठ पुलिस, एसओजी देहात और जिला कृषि अधिकारी राहुल तेवतिया की मौजूदगी में संयुक्त अभियान चलाया गया।पुलिस ने एक हुंडई औरा कार, एक कैंटर और दो पिकअप वाहनों को रोककर तलाशी ली। जांच में कार से चार कट्टे, कैंटर से 350 कट्टे तथा दोनों पिकअप से 100 कट्टे अनुदानित यूरिया बरामद हुआ। आरोपियों द्वारा दिखाए गए बिलों की जांच करने पर वे फर्जी पाए गए।गिरफ्तार आरोपियों की पहचान तनवीर तेली निवासी नागल (सहारनपुर), राहिल राणा निवासी दौलतपुर (यमुनानगर), रियासत निवासी चांदाहेड़ी (देवबंद), मोहित निवासी तिगरा (यमुनानगर), मनीष निवासी सादीपुर (यमुनानगर), सौरभ उर्फ हिमांशु, रोहन उर्फ प्रियांशु तथा सूर्य प्रताप उर्फ तुषार निवासी भोपा क्षेत्र, मुजफ्फरनगर के रूप में हुई है।पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह किसानों के लिए निर्धारित अनुदानित यूरिया को अधिक कीमत देकर खरीदता था और उसे हरियाणा के यमुनानगर क्षेत्र में पहुंचाकर प्लाईवुड उद्योगों को बेच देता था। आरोपियों द्वारा पुलिस की नजर से बचने के लिए मालवाहक वाहनों के आगे कार चलाकर रैकी कराई जाती थी। साथ ही खाद के परिवहन के लिए फर्जी बिल भी तैयार कराए जाते थे।पूछताछ में यह भी पता चला कि प्लाईवुड फैक्ट्रियों में गोंद (ग्लू) बनाने के लिए तकनीकी श्रेणी के यूरिया के स्थान पर सस्ता अनुदानित यूरिया इस्तेमाल किया जा रहा था, जिससे उत्पादन लागत काफी कम हो जाती थी। इसी वजह से उद्योगों में इसकी मांग अधिक थी और कालाबाजारी का यह नेटवर्क सक्रिय था।पुलिस के अनुसार गिरोह ने पिछले छह महीनों में करीब 15.12 लाख किलोग्राम अनुदानित यूरिया की अवैध बिक्री की है। इस मामले में आवश्यक वस्तु अधिनियम और विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। साथ ही गिरोह के आपराधिक इतिहास और अन्य सहयोगियों की भी जांच की जा रही है।इस उल्लेखनीय कार्रवाई के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने पुलिस टीम को 25 हजार रुपये के नकद पुरस्कार से सम्मानित किया है।

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