मुजफ्फरनगर। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में बुधवार को जिला कारागार का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान जनपद न्यायाधीश एवं प्राधिकरण के अध्यक्ष वीरेन्द्र कुमार सिंह, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक तथा अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने कारागार की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। अधिकारियों ने पाकशाला, अस्पताल, पुरुष बैरक और महिला बैरक का निरीक्षण कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।निरीक्षण के दौरान बंदियों को उनके संवैधानिक और विधिक अधिकारों की जानकारी भी दी गई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव डॉ. सत्येन्द्र कुमार चौधरी तथा विधिक सहायता अधिवक्ताओं ने बंदियों को बताया कि प्रत्येक बंदी को न्यायिक प्रक्रिया में विधिक सहायता प्राप्त करने का अधिकार है और उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहना चाहिए।डॉ. चौधरी ने बंदियों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने कहा कि दोषसिद्ध बंदियों को यदि उच्च न्यायालय में अपील दाखिल करने या किसी अन्य कानूनी प्रक्रिया में कठिनाई हो रही है तो वे जिला कारागार प्रशासन के माध्यम से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को आवेदन दे सकते हैं। ऐसे मामलों में नियमानुसार विधिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।अधिकारियों ने कारागार अधीक्षक को निर्देशित किया कि जिन बंदियों के मामले ई-जेल लोक अदालत अथवा जेल लोक अदालत के माध्यम से निस्तारित किए जा सकते हैं, उनकी सूची शीघ्र जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भेजी जाए। इससे लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण में मदद मिलेगी और पात्र बंदियों को शीघ्र राहत मिल सकेगी।निरीक्षण के दौरान उन बंदियों के मामलों की भी समीक्षा की गई, जिनकी जमानत याचिकाएं अधीनस्थ न्यायालयों में स्वीकार हो चुकी हैं। ऐसे बंदियों को आवश्यक विधिक सहायता उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों ने कारागार प्रशासन को बंदियों के अधिकारों और सुविधाओं के प्रति संवेदनशील रहते हुए व्यवस्थाएं बेहतर बनाए रखने के निर्देश दिए।

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