मुजफ्फरनगर। श्रावण मास की कांवड़ यात्रा के दौरान एक शिवभक्त का अपने माता-पिता के प्रति समर्पण लोगों के लिए प्रेरणा का विषय बना हुआ है। बुलंदशहर जनपद के सिकंदराबाद निवासी जितेंद्र अपने वृद्ध माता-पिता धर्मवीर लाल और रहबती देवी को विशेष पालकी में कंधों पर बैठाकर हरिद्वार से सिकंदराबाद तक की यात्रा कर रहे हैं। यात्रा के दौरान जहां-जहां उनकी कांवड़ पहुंच रही है, वहां लोग उनके सेवा भाव की सराहना कर रहे हैं।जितेंद्र ने बताया कि उन्होंने 15 जुलाई को हरिद्वार से गंगाजल लेकर यात्रा प्रारंभ की थी। उसी समय उन्होंने संकल्प लिया कि वह अपने माता-पिता को स्वयं कंधों पर बैठाकर पूरे मार्ग की यात्रा कराएंगे। उनका कहना है कि माता-पिता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है और इसी भावना के साथ वह भगवान शिव का स्मरण करते हुए लगातार पैदल यात्रा कर रहे हैं।कई किलोमीटर लंबे मार्ग पर वृद्ध माता-पिता का भार उठाकर चलना आसान नहीं है, लेकिन जितेंद्र बिना किसी शिकायत के प्रतिदिन आगे बढ़ रहे हैं। रास्ते में मिलने वाले श्रद्धालु और स्थानीय लोग उनकी इस अनोखी कांवड़ को देखकर रुक जाते हैं तथा उनका अभिवादन करते हुए सेवा और संस्कार के इस उदाहरण की प्रशंसा करते हैं।मुजफ्फरनगर जनपद के खतौली नगर क्षेत्र में यात्रा पहुंचने पर क्षेत्रीय मंडल यातायात अधिकारी राजीव कुमार तथा प्रभारी निरीक्षक दिशांत त्यागी ने भी जितेंद्र से मुलाकात की। अधिकारियों ने उनके माता-पिता का सम्मान करते हुए जितेंद्र के सेवा भाव की सराहना की। उनका कहना था कि वर्तमान समय में ऐसे उदाहरण समाज को परिवार के प्रति अपने दायित्वों की याद दिलाते हैं और नई पीढ़ी को माता-पिता के सम्मान एवं सेवा के लिए प्रेरित करते हैं।पौराणिक कथाओं में श्रवण कुमार द्वारा माता-पिता को कंधों पर बैठाकर तीर्थ यात्रा कराने की कथा का उल्लेख मिलता है। स्थानीय लोग जितेंद्र के इस प्रयास को उसी परंपरा का जीवंत उदाहरण मान रहे हैं। उनका यह संकल्प केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और मातृ-पितृ सेवा के महत्व का भी सशक्त संदेश देता है। यात्रा के दौरान उनका उद्देश्य भगवान शिव का जलाभिषेक करने के साथ-साथ समाज में माता-पिता के सम्मान और सेवा की भावना को मजबूत करना भी है।