बागपत। सिंघावली अहीर थाना क्षेत्र में एसटीएफ और पुलिस की संयुक्त टीम के साथ हुई मुठभेड़ में घायल हुए विपुल उर्फ खूनी की उपचार के दौरान मौत के मामले में अब मजिस्ट्रियल जांच कराई जाएगी। जिला मजिस्ट्रेट के निर्देश पर जांच की जिम्मेदारी प्रभारी अधिकारी द्वितीय एवं डिप्टी कलेक्टर बागपत को सौंपी गई है। जांच अधिकारी को घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर एक माह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।25 जुलाई 2026 को मेरठ एसटीएफ की फील्ड यूनिट और सिंघावली अहीर थाना पुलिस की संयुक्त टीम के साथ विपुल उर्फ खूनी की मुठभेड़ हुई थी। पुलिस के अनुसार मुठभेड़ के दौरान गोली लगने से विपुल घायल हो गया था। पुलिस टीम ने उसे उपचार के लिए सीएचसी पिलाना पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उसकी हालत गंभीर देखते हुए जिला अस्पताल बागपत रेफर कर दिया था। जिला अस्पताल में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई थी।विपुल उर्फ खूनी पुत्र नेत्रपाल सिंह शामली जिले के कांधला थाना क्षेत्र के गांव भभीसा का रहने वाला था। पुलिस के अनुसार वह 50 हजार रुपये का इनामी बदमाश था। उसके खिलाफ विभिन्न आपराधिक मामलों में मुकदमे दर्ज बताए गए हैं। पुलिस उसे कुख्यात सुशील मूंछ गिरोह का सक्रिय सदस्य और शार्प शूटर भी बताती रही है।मुठभेड़ के संबंध में सिंघावली अहीर थाने में मुकदमा अपराध संख्या 248/2026 दर्ज किया गया है। इसमें बीएनएस की संबंधित धाराओं के साथ शस्त्र अधिनियम की धारा 3/25/27 के तहत कार्रवाई की गई है। मामले की विवेचना फिलहाल जारी है। इसी बीच प्रशासन ने मुठभेड़ में विपुल के घायल होने और उपचार के दौरान उसकी मौत की परिस्थितियों की मजिस्ट्रियल जांच कराने का निर्णय लिया है।जांच के दौरान मुठभेड़ में शामिल पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज किए जाएंगे। घटना से संबंधित पुलिस अभिलेख और उपलब्ध साक्ष्यों की भी जांच की जाएगी। सिंघावली अहीर थाने से मामले से जुड़े दस्तावेजों की सत्यापित प्रतियां जांच अधिकारी को उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा यदि जिले के किसी अन्य थाने में घटना से संबंधित कोई अभिलेख या साक्ष्य मौजूद है तो उसे भी जांच में शामिल किया जाएगा।विपुल को मुठभेड़ के बाद सीएचसी पिलाना में उपचार दिया गया था। इसलिए वहां उपचार करने वाले चिकित्सकों और कर्मचारियों के बयान भी लिए जाएंगे। इसके बाद जिला अस्पताल में हुए उपचार से संबंधित अभिलेखों और चिकित्सकीय प्रक्रिया की भी जांच होगी। पोस्टमार्टम से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान भी जांच का हिस्सा बनाए जाएंगे।जिला प्रशासन की ओर से घटना के संबंध में आम लोगों को भी अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है। यदि किसी व्यक्ति के पास मुठभेड़ से जुड़ी कोई जानकारी, बयान या साक्ष्य है तो वह 15 दिनों के भीतर किसी भी कार्यदिवस में जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर उसे प्रस्तुत कर सकता है। प्रत्यक्षदर्शियों अथवा घटना के संबंध में जानकारी रखने वाले अन्य लोगों के बयान भी जांच में शामिल किए जाएंगे।मृतक विपुल उर्फ खूनी के परिजनों को भी अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा। परिजनों को जांच के संबंध में सूचना देने के लिए कांधला थाना पुलिस को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। जांच अधिकारी सभी संबंधित पक्षों के बयान, पुलिस रिकॉर्ड, चिकित्सकीय दस्तावेज और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद एक माह के भीतर जांच पूरी करेंगे। इसके बाद जांच रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपी जाएगी।