नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब आम आदमी पार्टी (आप) के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ गई। पार्टी के प्रमुख चेहरे और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने दो अन्य राज्यसभा सांसदों संदीप पाठक और अशोक मित्तल के साथ पार्टी से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की घोषणा कर दी। इस घटनाक्रम को आप के लिए अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
नई दिल्ली स्थित कांस्टिटुइशन क्लब ऑफ़ इंडिया  में आयोजित प्रेस वार्ता में राघव चड्ढा ने पार्टी नेतृत्व पर गंभीर और सीधे आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी अब अपने मूल उद्देश्यों और आदर्शों से भटक चुकी है। “जिस पार्टी की नींव भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन पर रखी गई थी, आज वही पार्टी समझौता करने वाले लोगों के प्रभाव में आ गई है,” चड्ढा ने कहा।
उन्होंने भावुक लहजे में पार्टी के साथ अपने जुड़ाव को याद करते हुए कहा कि यह संगठन उनके “खून-पसीने से सींची गई” विरासत है। खुद को संस्थापक सदस्यों में शामिल बताते हुए उन्होंने कहा कि पिछले एक वर्ष से वे पार्टी की नीतियों और कार्यशैली से असहमत होकर सक्रिय भूमिका से दूर थे। चड्ढा ने यह भी दावा किया कि पार्टी के भीतर असंतोष गहरा है और आने वाले समय में दो-तिहाई सांसद भाजपा में शामिल हो सकते हैं।
वहीं, संदीप पाठक ने अपने बयान में कहा कि उन्होंने एक दशक तक पार्टी के लिए दिन-रात मेहनत की और संगठन को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य हमेशा देशहित में कार्य करना रहा, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में उन्हें यह कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
तीसरे सांसद अशोक मित्तल ने भी पार्टी नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि अब संगठन में पारदर्शिता और वैचारिक स्पष्टता का अभाव दिखाई दे रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह घटनाक्रम न केवल आम आदमी पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को प्रभावित करेगा, बल्कि आगामी चुनावों में उसकी रणनीति और जनाधार पर भी सीधा असर डाल सकता है। वहीं भाजपा के लिए यह घटनाक्रम एक बड़ी राजनीतिक बढ़त के रूप में देखा जा रहा है, जिससे उसकी संसद में स्थिति और मजबूत हो सकती है।

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