मुजफ्फरनगर। कृषि विभाग ने नियमों के अनुपालन को लेकर बड़ी कार्रवाई करते हुए जिले के 129 कीटनाशक विक्रेताओं के लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए हैं। यह कार्रवाई एकीकृत कीटनाशी प्रबंधन प्रणाली (आईपीएमएस) पोर्टल पर अनिवार्य पंजीकरण न कराने के कारण की गई है। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि अब बिना पंजीकरण किसी भी विक्रेता को कीटनाशक व्यापार की अनुमति नहीं दी जाएगी।
कृषि रक्षा अधिकारी राहुल सिंह तेवतिया द्वारा जारी आदेश के अनुसार शासन और कृषि निदेशालय ने सभी कीटनाशक विक्रेताओं के लिए आईपीएमएस पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य किया था। इसके लिए समय-समय पर निर्देश जारी किए गए और संबंधित विक्रेताओं को पर्याप्त अवसर भी प्रदान किया गया। पंजीकरण न कराने वाले विक्रेताओं के लाइसेंस पहले निलंबित किए गए थे तथा उन्हें अंतिम मौका देते हुए प्रेस विज्ञप्तियों और समाचार पत्रों के माध्यम से भी सूचना प्रसारित की गई थी।
इसके बावजूद 129 विक्रेताओं द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर पंजीकरण प्रक्रिया पूरी नहीं की गई। विभाग ने इसे नियमों की गंभीर अवहेलना मानते हुए कीटनाशी अधिनियम 1968 के नियम 14-ख के अंतर्गत उनके लाइसेंस निरस्त कर दिए। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि पंजीकरण न कराना इस बात का संकेत है कि संबंधित विक्रेता अब कीटनाशक व्यापार में सक्रिय नहीं रहना चाहते।
विभाग ने निरस्त लाइसेंस वाले सभी विक्रेताओं को निर्देशित किया है कि वे 30 दिन के भीतर अपने पास उपलब्ध कीटनाशकों के स्टॉक का विधिवत निस्तारण कर लें। निर्धारित अवधि के बाद यदि कोई विक्रेता अवैध रूप से व्यापार करते हुए पाया गया, तो उसके विरुद्ध कीटनाशी अधिनियम 1968 एवं नियमावली 1971 के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कृषि विभाग की इस कार्रवाई से जिले में कीटनाशक कारोबार से जुड़े अन्य विक्रेताओं में हड़कंप मच गया है। विभाग ने साफ संकेत दिए हैं कि नियमों के उल्लंघन पर भविष्य में भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
