मुजफ्फरनगर। सोशल मीडिया पर दोस्ती, भावनात्मक संबंध और ऑनलाइन ट्रेडिंग में मोटे मुनाफे का सपना दिखाकर लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले एक बड़े साइबर गिरोह का मुजफ्फरनगर साइबर पुलिस ने पर्दाफाश किया है। मामले की जांच के दौरान सामने आए तथ्यों ने पुलिस अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। शुरुआती तौर पर करीब एक करोड़ रुपये की ठगी का मामला प्रतीत हो रहा था, लेकिन बैंक खातों और डिजिटल साक्ष्यों की गहन पड़ताल में 27.21 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध लेन-देन का खुलासा हुआ है।साइबर थाना पुलिस की जांच में पता चला कि गिरोह सुनियोजित तरीके से देश के विभिन्न राज्यों में लोगों को अपना शिकार बना रहा था। आरोपियों द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर महिलाओं के नाम से आकर्षक फर्जी प्रोफाइल बनाई जाती थीं। इन प्रोफाइलों के माध्यम से लोगों से संपर्क कर पहले दोस्ती की जाती थी और फिर धीरे-धीरे विश्वास जीतकर उन्हें निवेश के नाम पर जाल में फंसा लिया जाता था।मामले में कार्रवाई करते हुए साइबर पुलिस ने दिल्ली के स्वरूप नगर क्षेत्र से गिरोह से जुड़े एक आरोपी मोहित कुमार को गिरफ्तार किया है। वहीं गिरोह के दो अन्य अहम सदस्यों को पूछताछ के लिए प्रोडक्शन वारंट पर लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस का मानना है कि इन आरोपियों से पूछताछ के बाद पूरे नेटवर्क से जुड़े कई और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।जांच के दौरान सामने आया कि गिरोह का कामकाज केवल एक राज्य तक सीमित नहीं था। इसके तार उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों से जुड़े मिले हैं। आरोपियों के बैंक खातों में करोड़ों रुपये का लेन-देन पाया गया है, जिसकी विस्तृत जांच की जा रही है।पुलिस के अनुसार गिरोह का शिकार बने एक व्यक्ति को सोशल मीडिया पर एक महिला के नाम से फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी गई थी। बातचीत का सिलसिला बढ़ने के बाद उसे ऑनलाइन ट्रेडिंग के जरिए कम समय में अधिक मुनाफा कमाने का भरोसा दिलाया गया। इसके लिए एक संदिग्ध वेबसाइट और विभिन्न व्हाट्सएप ग्रुपों का सहारा लिया गया, जहां नकली निवेशकों को भारी लाभ कमाते हुए दिखाया जाता था। इसी विश्वास में आकर पीड़ित ने अलग-अलग चरणों में एक करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि निवेश कर दी।जब पीड़ित ने अपने खाते में दिख रहे कथित मुनाफे को निकालने का प्रयास किया तो जालसाजों ने नए-नए बहाने बनाकर उससे और धनराशि जमा कराने का दबाव बनाया। कभी वेरिफिकेशन शुल्क तो कभी एंटी मनी लॉन्ड्रिंग प्रक्रिया के नाम पर पैसे मांगे गए। संदेह होने पर पीड़ित ने साइबर पुलिस से संपर्क किया, जिसके बाद मामले की जांच शुरू हुई।साइबर पुलिस की टीम ने बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, डिजिटल ट्रांजैक्शन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की मदद से पूरे नेटवर्क की परतें खोलनी शुरू कीं। जांच में कई बैंक खातों में करोड़ों रुपये के लेन-देन का पता चला, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि गिरोह लंबे समय से संगठित तरीके से साइबर अपराध को अंजाम दे रहा था।पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में पहले भी कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। उनके कब्जे से मोबाइल फोन, लैपटॉप, एटीएम कार्ड और बैंकिंग से जुड़े कई दस्तावेज बरामद हुए थे। वर्तमान जांच में मिले तथ्यों के आधार पर गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है।वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराधियों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए व्यापक कार्रवाई की जाएगी।

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