मुजफ्फरनगर। सरकार की नई ई-पंजीकरण व्यवस्था के विरोध में बुढ़ाना तहसील में अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों और स्टांप विक्रेताओं का आंदोलन लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा। बार एसोसिएशन के नेतृत्व में चल रही कलमबंद हड़ताल के कारण तहसील परिसर स्थित रजिस्ट्री कार्यालयों में पूरा कामकाज प्रभावित रहा। दिनभर रजिस्ट्री से जुड़े कार्य नहीं हो सके, जिससे संपत्तियों की खरीद-फरोख्त और दस्तावेजों के पंजीकरण के लिए आए लोगों को निराश होकर वापस लौटना पड़ा।मंगलवार को भी तहसील परिसर में अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों और स्टांप विक्रेताओं ने एकजुट होकर नई व्यवस्था के खिलाफ विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ई-पंजीकरण प्रणाली लागू होने से वर्षों से इस कार्य से जुड़े लोगों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो जाएगा। उनका आरोप है कि नई व्यवस्था में पारंपरिक रूप से काम कर रहे दस्तावेज लेखकों और अधिवक्ताओं की भूमिका सीमित की जा रही है, जिससे हजारों परिवार प्रभावित होंगे।बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेशपाल वर्मा और महासचिव सुभाष राठी ने कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर विचार नहीं करती और नई व्यवस्था में आवश्यक संशोधन नहीं करती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि हड़ताल के चलते अधिवक्ताओं ने न्यायिक, प्रशासनिक और रजिस्ट्री संबंधी सभी कार्यों से दूरी बनाए रखी है।आंदोलन को मजबूत बनाए रखने के लिए बार एसोसिएशन ने सख्त रुख अपनाया है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई अधिवक्ता, दस्तावेज लेखक या टाइपिस्ट हड़ताल के दौरान काम करता पाया गया तो उसके खिलाफ संगठनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए आर्थिक दंड का भी प्रावधान रखा गया है।हड़ताल का असर तहसील के कामकाज पर साफ दिखाई दिया। रजिस्ट्री कार्यालयों में सामान्य दिनों की तुलना में सन्नाटा पसरा रहा और बड़ी संख्या में रजिस्ट्री संबंधी फाइलें लंबित रह गईं। दूर-दराज के गांवों और कस्बों से पहुंचे लोगों को अपने कार्य पूरे न होने के कारण परेशानी का सामना करना पड़ा।प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह केवल एक व्यवस्था का विरोध नहीं, बल्कि उनके रोजगार और भविष्य की लड़ाई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शासन स्तर पर जल्द कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।हड़ताल और प्रदर्शन के दौरान पूर्व अध्यक्ष विनय बालियान, अशोक राठी, श्यामवीर सिंह, अंकित शर्मा, दीपक राठी, अनिल कुमार, विकास त्यागी, अवध बिहारी गर्ग, शिवम निमेष, अजय राठी और शिवकुमार सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता, स्टांप विक्रेता और दस्तावेज लेखक मौजूद रहे।