खतौली। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तावित ई-रजिस्ट्री और पेपरलेस पंजीकरण व्यवस्था के विरोध में खतौली तहसील में अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों और स्टांप वेंडरों का धरना-प्रदर्शन जारी है। आंदोलनकारियों ने सरकार के प्रस्ताव के खिलाफ जोरदार विरोध जताते हुए चेतावनी दी कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।सब रजिस्ट्रार कार्यालय परिसर में आयोजित धरने को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि नई व्यवस्था लागू होने से लाखों परिवारों की रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो जाएगा। उनका आरोप है कि रजिस्ट्री व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी की जा रही है, जिससे अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों, स्टांप विक्रेताओं, टाइपिस्टों और कचहरी से जुड़े छोटे व्यापारियों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।वक्ताओं ने कहा कि यह केवल रोजगार का मुद्दा नहीं है, बल्कि वर्षों से चली आ रही कानूनी व्यवस्था और आम लोगों के अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय है। यदि पंजीकरण व्यवस्था पूरी तरह डिजिटल और निजी नियंत्रण में चली गई तो आम नागरिकों को भी अतिरिक्त परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।धरने के चलते खतौली तहसील में संपत्ति पंजीकरण सहित कई कार्य प्रभावित रहे। सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में सन्नाटा पसरा रहा। जमीन-जायदाद की रजिस्ट्री कराने पहुंचे लोगों को बिना काम कराए वापस लौटना पड़ा, जिससे उन्हें भारी असुविधा हुई।धरने में तहसील बार संघ अध्यक्ष सुभाष चंद, महासचिव सत्यप्रकाश सैनी, जितेंद्र सिंह, शकुंतला देवी, वेदप्रकाश उपाध्याय, प्रमोद शर्मा, राजवीर सिंह, सचिन आर्य, मुकेश शर्मा, दिमाग सिंह, अभिषेक गोयल और चतरपाल सिंह मौजूद रहे। दस्तावेज लेखक संघ के जिलाध्यक्ष आदेश मोटला और तहसील अध्यक्ष सुशील वर्मा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में दस्तावेज लेखक और स्टांप विक्रेता भी आंदोलन में शामिल रहे।आंदोलनकारियों ने सरकार से शीघ्र वार्ता कर समाधान निकालने की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक प्रस्ताव वापस नहीं लिया जाता या सकारात्मक निर्णय नहीं होता, विरोध जारी रहेगा।