मुजफ्फरनगर(आकाश तायल)। गोरक्षा और सनातन धर्म के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से निकाली जा रही 81 दिवसीय गविष्टि यात्रा के तहत शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती रविवार को बुढ़ाना, समोली और खतौली पहुंचे। इस दौरान विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं, संतों और सामाजिक संगठनों ने उनका जोरदार स्वागत किया।

सभाओं में उन्होंने गोसेवा, गोरक्षा, कृषि और पर्यावरण संरक्षण पर विस्तार से अपने विचार रखे।बुढ़ाना स्थित एसडी गर्ल्स पीजी कॉलेज में आयोजित सभा में शंकराचार्य ने कहा कि सनातन परंपरा में गाय को माता का स्थान दिया गया है। गाय केवल दूध देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसका गोबर और गोमूत्र भी खेती और ग्रामीण जीवन के लिए उपयोगी है। उन्होंने कहा कि गाय जब दूध देना बंद कर दे, तब भी उसकी सेवा और रक्षा करना समाज का दायित्व है।उन्होंने कहा कि भारतीय खेती में गोवंश की हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका रही है। गोवंश आधारित प्राकृतिक खेती जमीन की उर्वरता बढ़ाने के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक है। सड़कों पर घूम रहे बेसहारा और घायल गोवंश पर चिंता जताते हुए उन्होंने समाज और प्रशासन से ठोस कदम उठाने की अपील की।खतौली में आयोजित सभा में शंकराचार्य ने मतदान को भी गौ-संरक्षण से जोड़ते हुए कहा कि वोट केवल सरकार चुनने का माध्यम नहीं, बल्कि देश की दिशा तय करने का अधिकार भी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि मतदान करते समय यह जरूर देखें कि कौन गौ-संरक्षण और गौ-कल्याण के लिए गंभीर है।बुढ़ाना के बाद शंकराचार्य का काफिला समोली और फिर खतौली पहुंचा, जहां विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने उनका स्वागत किया। उन्होंने कहा कि गोवंश संरक्षण केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि कृषि, पर्यावरण और ग्रामीण जीवन से जुड़ा राष्ट्रीय मुद्दा है।कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों को गोसेवा, गोरक्षा और सनातन संस्कृति के संरक्षण का संकल्प दिलाया गया। सभा में डॉ. सत्येंद्र पाल, डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा, प्रमोद गर्ग, शोबीर नागर, आदेश त्यागी और मुकेश शर्मा सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Join WhatsApp Group