मुजफ्फरनगर। चरथावल नगर पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर करोड़ों रुपये के बजट में कथित गड़बड़ी का मामला उजागर होने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। विजिलेंस जांच में करीब 5.37 करोड़ रुपये की सरकारी धनराशि के दुरुपयोग, नियमों की अनदेखी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने पर पूर्व चेयरमैन, पूर्व अधिशासी अधिकारी, अवर अभियंता और वरिष्ठ लिपिक समेत सात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।जांच में सामने आया कि अनुसूचित जाति और जनजाति बहुल बस्तियों के विकास के लिए शासन द्वारा 3.56 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई थी। इस धनराशि का उद्देश्य दलित बस्तियों में सड़क, नाली, जल निकासी और प्रकाश व्यवस्था जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना था। आरोप है कि नियमानुसार इन क्षेत्रों में कार्य कराने के बजाय धनराशि का बड़ा हिस्सा नगर पंचायत सीमा से बाहर खुसरोपुर मार्ग के निर्माण में खर्च कर दिया गया। इससे पात्र बस्तियां विकास कार्यों से वंचित रह गईं।विजिलेंस रिपोर्ट में कान्हा पशु आश्रय स्थल के बजट में भी गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। गौशाला निर्माण के लिए स्वीकृत 1.81 करोड़ रुपये में से बड़ी राशि का उपयोग कथित रूप से नगर पंचायत कार्यालय भवन के प्रथम तल के निर्माण में कर लिया गया। जांच अधिकारियों के अनुसार, यह खर्च स्वीकृत मद के विपरीत किया गया, जो वित्तीय नियमों का स्पष्ट उल्लंघन माना जा रहा है।सोलर लाइट परियोजना में भी नियमों को दरकिनार करने के आरोप लगे हैं। जांच में पता चला कि कस्बे में सोलर लाइट लगाने का कार्य बिना विधिवत निविदा प्रक्रिया पूरी किए एक निजी फर्म को दे दिया गया। आरोप है कि पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने के बजाय सीमित स्तर पर कोटेशन लेकर कार्य आवंटित किया गया, जिससे सरकारी खरीद प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं।मामले में तत्कालीन चेयरमैन बीना त्यागी, पूर्व अधिशासी अधिकारी वेदप्रकाश, अवर अभियंता कौशलवीर सिंह, वरिष्ठ लिपिक महेश प्रसाद समेत सात लोगों को नामजद किया गया है। इनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश जैसी गंभीर धाराओं में कार्रवाई की गई है।इस प्रकरण का एक भावनात्मक पक्ष भी सामने आया है। घोटाले को उजागर करने के लिए लंबे समय तक आवाज उठाने वाले पूर्व सभासद बिजेंद्र त्यागी का कुछ माह पूर्व निधन हो चुका है। वहीं, प्रकरण से जुड़े एक अन्य अधिकारी का भी देहांत हो चुका है। इसके बावजूद वर्षों पुरानी फाइलों के खुलने से मामले ने नया मोड़ ले लिया है।वर्तमान नामित सभासद प्रशांत त्यागी ने मांग की है कि केवल नामजद आरोपियों तक कार्रवाई सीमित न रखी जाए। उन्होंने संबंधित अवधि के सभी विकास कार्यों की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है ताकि पूरे प्रकरण में शामिल अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका भी स्पष्ट हो सके।सूत्रों के अनुसार वर्ष 2018 से 2022 के बीच कराए गए विकास कार्यों की फाइलों और भुगतान अभिलेखों की गहन जांच जारी है। विजिलेंस अधिकारियों का कहना है कि सरकारी धन के दुरुपयोग में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। जांच पूरी होने के बाद आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी सहित आगे की कानूनी कार्रवाई तेज की जा सकती है।