नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन में शामिल संगठनों और समर्थकों ने इसे अपनी प्रमुख मांग पूरी होने के रूप में देखा। इस्तीफे की सूचना मिलते ही प्रदर्शन स्थल पर मौजूद छात्र और कार्यकर्ता एक-दूसरे को बधाई देने लगे। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि यह किसी व्यक्ति विशेष की नहीं, बल्कि देशभर के छात्रों के लंबे संघर्ष और एकजुटता की सफलता है।मीडिया से बातचीत में अभिजीत दीपके ने कहा कि पिछले कई सप्ताह से छात्र शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे थे। उनका कहना था कि इस दौरान अनेक लोगों ने आंदोलन की सफलता पर सवाल उठाए, लेकिन छात्रों ने धैर्य नहीं खोया और अपनी मांग पर लगातार डटे रहे। उन्होंने कहा कि आखिरकार सरकार को छात्रों की भावनाओं का सम्मान करते हुए निर्णय लेना पड़ा।आंदोलनकारी नेता ने कहा कि लंबे समय से यह धारणा बनाई जा रही थी कि सरकार अपने मंत्रियों से इस्तीफा नहीं लेती, लेकिन इस घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया कि लोकतांत्रिक तरीके से उठाई गई आवाज भी असर डाल सकती है। उन्होंने इसे युवाओं की एकता और लोकतांत्रिक संघर्ष की उपलब्धि बताया।शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की घोषणा के बाद जंतर-मंतर पर मौजूद समर्थकों ने खुशी जताई। प्रदर्शन स्थल पर छात्रों और कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे का अभिवादन किया तथा आंदोलन में सहयोग देने वालों का आभार व्यक्त किया। कई छात्रों ने इसे परीक्षा प्रणाली में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।हालांकि, आंदोलन से जुड़े नेताओं ने संकेत दिए कि उनकी अन्य मांगों पर भी सरकार से बातचीत जारी रहेगी। उनका कहना है कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, पेपर लीक की घटनाओं पर प्रभावी रोक तथा छात्रों के हितों से जुड़े मुद्दों पर ठोस निर्णय होने तक वे अपनी आगे की रणनीति तय करेंगे। वहीं, सरकार की ओर से इस संबंध में आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।