सहारनपुर। जहां आज भी कई जगहों पर शादियां दहेज और दिखावे की भेंट चढ़ जाती हैं, वहीं सहारनपुर जिले के नकुड़ क्षेत्र में एक युवक ने अपनी सादगी और सोच से समाज को नई दिशा देने का काम किया है। विवाह समारोह के दौरान दूल्हे ने शगुन में दिए जा रहे ढाई लाख रुपये लेने से इनकार कर दिया और केवल एक रुपया तथा नारियल स्वीकार कर शादी की रस्म पूरी की। दूल्हे के इस कदम की अब पूरे इलाके में चर्चा हो रही है और लोग इसे दहेज प्रथा के खिलाफ एक प्रेरणादायक उदाहरण बता रहे हैं।मामला नकुड़ थाना क्षेत्र के गांव लद्देबांस का है, जहां गंगोह क्षेत्र के गांव चमनपुरा निवासी शिवा सैनी की बारात पहुंची थी। गांव में विवाह समारोह को लेकर उत्साह का माहौल था। बैंक्वेट हॉल में आयोजित कार्यक्रम में दोनों परिवारों के रिश्तेदारों और ग्रामीणों की भारी भीड़ मौजूद रही। पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच विवाह की रस्में शुरू हुईं और वधु पक्ष ने पूरे सम्मान के साथ बारात का स्वागत किया।बताया गया कि शादी के दौरान वधु पक्ष की ओर से शगुन के रूप में शिवा सैनी को 2 लाख 50 हजार रुपये भेंट किए गए। लेकिन जैसे ही रकम दूल्हे के सामने रखी गई, उन्होंने उसे लेने से साफ मना कर दिया। दूल्हे ने कहा कि वह दहेज लेने के पक्ष में नहीं हैं और उनके लिए दुल्हन ही सबसे बड़ा उपहार है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि शादी कोई सौदा नहीं, बल्कि दो परिवारों का पवित्र रिश्ता है, जिसे पैसों से नहीं तौला जाना चाहिए।दूल्हे के इस फैसले के बाद कुछ देर के लिए समारोह में सन्नाटा छा गया, लेकिन फिर लोगों ने तालियां बजाकर उसकी सराहना की। वधु पक्ष ने काफी अनुरोध किया, मगर शिवा अपने निर्णय पर कायम रहे। बाद में उन्होंने केवल परंपरा निभाने के लिए एक रुपया और नारियल स्वीकार किया तथा बाकी पूरी धनराशि सम्मानपूर्वक वापस लौटा दी।दूल्हे की इस सोच ने वहां मौजूद लोगों का दिल जीत लिया। समारोह में मौजूद बुजुर्गों और सामाजिक लोगों ने कहा कि यदि युवा इसी तरह दहेज प्रथा के खिलाफ आगे आएं, तो समाज से यह कुरीति धीरे-धीरे खत्म हो सकती है। कई लोगों ने इसे नई पीढ़ी की सकारात्मक सोच और सामाजिक बदलाव की मिसाल बताया।यह शादी अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। लोग दूल्हे शिवा सैनी की जमकर प्रशंसा कर रहे हैं और इसे रिश्तों की सच्ची अहमियत समझाने वाला कदम बता रहे हैं।